Ranchi : झारखंड में मानसून की बेरुखी ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं. आसमान में बादलों की आवाजाही तो है, लेकिन वे उम्मीद के मुताबिक बरस नहीं रहे हैं. धान की रोपनी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में इस अवधि तक सामान्य तौर पर 206.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तव में सिर्फ 111.1 मिलीमीटर पानी ही बरसा है. यानी पूरे सूबे में 46 प्रतिशत कम बारिश हुई है.
साहिबगंज और गढ़वा काफी कम बारिश
झारखंड के दो जिले साहिबगंज और गढ़वा में काफी कम बारिश हुई है. साहिबगंज में तो स्थिति भयावह हो चुकी है. जहां सामान्य रूप से होने वाली 253.7 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले महज 3.2 मिलीमीटर बारिश हुआ है. जो कि 99 फीसदी की रिकॉर्ड गिरावट है. वहीं, गढ़वा में सामान्य से 91 प्रतिशत कम सिर्फ 12.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है. इसके अलावा गोड्डा में 80% और कोडरमा में 74% बारिश कम हुई है.

सिर्फ तीन जिलों में थोड़ी राहत, बाकी जगह स्थिति चिंताजनक
पूरे राज्य की बात करें, तो केवल दुमका, रांची और सिमडेगा ऐसे जिले हैं, जहां मानसून की स्थिति को थोड़ी बेहतर है. दुमका में सामान्य से सिर्फ 6% कम बारिश हुई है, जबकि राजधानी रांची में 14% और सिमडेगा में 23% की कमी देखी गई है. बाकी सभी 21 जिलों में मानसून पूरी तरह बेपटरी हो चुका है. चतरा में 70 फीसदी, पाकुड़ में 64 फीसदी, लोहरदगा में 63 फीसदी, बोकारो में 60 फीसदी और खूंटी में 60 फीसदी कम बारिश हुई है.
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