Chaibasa: भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पवन शंकर पाण्डेय ने पश्चिम सिंहभूम जिले में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा संचालित योजनाओं में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. इसे लेकर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, झारखंड सरकार के सचिव को ज्ञापन सौंपा है. ज्ञापन में कहा गया है कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी जिले के कई पंचायतों और गांवों में ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. कई स्थानों पर लोग आज भी चुआं एवं अन्य असुरक्षित जल स्रोतों पर निर्भर हैं. जिले में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए डीएमएफटी (DMFT) मद से करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं. पवन शंकर पाण्डेय ने आरोप लगाया कि चाईबासा एवं चक्रधरपुर पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के अंतर्गत वर्ष 2015 से 2026 तक डीएमएफटी मद से प्राप्त राशि का समुचित उपयोग नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि कई बड़ी पेयजल योजनाएं आज भी अधूरी पड़ी हुई हैं, जबकि उन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं. उन्होंने केरा, नकटी, सोनुवा, गोईलकेरा, मकरंदा, मनोहरपुर, लाइलोहर तथा लिलीमीली (टोंटो) सहित विभिन्न क्षेत्रों में संचालित योजनाओं की जांच कराने की मांग की है.
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जांच कराने से वित्तीय अनियमितता का होगा खुलासा
ज्ञापन में विभाग से आग्रह किया गया है कि वर्ष 2015-16 से 2025-26 तक प्राप्त डीएमएफटी राशि एवं उसके उपयोग की विस्तृत जांच कराई जाए, ताकि वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हो सके. साथ ही जिन अधिकारियों एवं कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाए, उनके विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. पवन शंकर पाण्डेय ने कहा कि पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पेयजल योजनाओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि जनता को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके और भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो.


