Chaibasa: जिले के खूंटपानी प्रखंड की माटकोबेडा पंचायत स्थित पांडरासाली रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में कोयला और लौह अयस्क की धूल से प्रदूषण बढ़ने का आरोप लगाया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे रैक से होने वाले परिवहन के कारण उड़ने वाली धूल से करीब 15 से 20 किलोमीटर तक का क्षेत्र प्रभावित हो रहा है. इससे खेती, पर्यावरण, पशुधन और लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है. यह इलाका वारंग क्षिति लिपि के जनक और समाज सुधारक ओतगुरु कोल लाको बोदरा की जन्मस्थली होने के कारण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

ग्रामीणों ने आंदोलन का किया ऐलान
इस समस्या को लेकर पांडरासाली में ग्रामीणों की बैठक हुई. बैठक में तय किया गया कि यदि जल्द प्रदूषण पर रोक नहीं लगाई गई तो जिला प्रशासन, रेलवे और संबंधित कंपनियों के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा. सामाजिक कार्यकर्ता सागू चरण हेंब्रम ने कहा कि कोयला और लौह अयस्क की धूल से किसानों की फसलें खराब हो रही हैं. जल, जंगल और जमीन प्रभावित हो रहे हैं और लोगों में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. उन्होंने प्रशासन और संबंधित कंपनियों से जल्द प्रभावी कदम उठाने की मांग की.

कोल्हान रक्षा संघ के सदस्य रविंद्र मंडल ने कहा कि पांडरासाली क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त रखना सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने प्रशासन से ओतगुरु कोल लाको बोदरा की जन्मस्थली की गरिमा और क्षेत्र के पर्यावरण की रक्षा के लिए जल्द कार्रवाई करने की मांग की.

‘पांडरासाली बचाओ-कोयला डस्ट हटाओ’ का नारा
बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि लगातार उड़ रही धूल से खेतों में लगी फसलें, पेड़-पौधे और पशु-पक्षी प्रभावित हो रहे हैं. साथ ही वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ रहा है. बैठक के अंत में ग्रामीणों ने “पांडरासाली बचाओ-कोयला डस्ट हटाओ” का नारा लगाते हुए क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त बनाने और ओतगुरु कोल लाको बोदरा की जन्मस्थली की गरिमा की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया.
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