31 अगस्त 2028 तक का मिला समय, नहीं तो दी जाएगी अनिवार्य सेवानिवृत्ति
Ranchi: झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (प्राथमिक शिक्षा निदेशालय) ने राज्य में कार्यरत सभी सेवारत सहायक शिक्षकों और सहायक अध्यापकों (पारा शिक्षकों) के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा आदेश जारी किया है. सरकार के सचिव उमा शंकर सिंह की ओर से जारी आदेश के तहत अब राज्य के सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) पास करना अनिवार्य कर दिया गया है. जो शिक्षक तय समय सीमा के भीतर यह परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है.
यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र सरकार व अन्य (सिविल अपील संख्या 1385/2025) के मामले में 1 सितंबर 2025 को पारित न्यायादेश के आलोक में जारी किया गया है. सरकारी आदेश के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस परीक्षा को पास करने के लिए 2 वर्ष का समय दिया था. लेकिन इसके विरुद्ध दायर रिव्यू पिटीशन (स्टेट ऑफ यूपी बनाम अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट व अन्य) में उच्चतम न्यायालय द्वारा 29 मई 2026 को पारित अंतिम आदेश के अंतर्गत पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने की इस अवधि को 31 अगस्त 2028 तक के लिए विस्तारित कर दिया गया है.
ALSO READ: ‘भारत के पुनर्निर्माण का दशक’ रहे मोदी सरकार के 12 वर्ष : अर्जुन मुंडा
क्या होगा फेल होने पर
यदि कोई भी सेवारत शिक्षक (जिनकी सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से अधिक का समय शेष है) इस विस्तारित अवधि (31 अगस्त 2028) तक टीईटी परीक्षा पास नहीं कर पाता है, तो उन्हें सेवा छोड़नी होगी. सरकार उन्हें नियमों के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे देगी और वे नियमानुसार ही वित्तीय लाभों के हकदार होंगे.
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
अदालत ने आदेश की कंडिका 35 में यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि समय सीमा को आगे बढ़ाने की किसी भी अन्य अर्जी पर अब भविष्य में विचार नहीं किया जाएगा. साथ ही राज्यों को साल में अधिमानतः दो बार टीईटी परीक्षा आयोजित करने का प्रयास करने को कहा है ताकि शिक्षकों को पर्याप्त मौके मिल सकें. जो सेवारत शिक्षक भविष्य में पदोन्नति पाना चाहते हैं, उनके लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य शर्त होगी.


