प्रशासन की सख्ती से अतिक्रमण मुक्त हुआ चतरा मोड़, अब शौचालय और पेयजल सुविधा की उठी मांग

Hazaribagh: चौपारण प्रखंड का चर्चित चतरा मोड़ प्रशासन की सख्ती के बाद पहली बार पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त हो सका. जिस स्थान...

Hazaribagh: चौपारण प्रखंड का चर्चित चतरा मोड़ प्रशासन की सख्ती के बाद पहली बार पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त हो सका. जिस स्थान पर देर रात तक होटल कर्मियों, ठेला संचालकों, फल विक्रेताओं और अस्थायी दुकानदारों की चहल-पहल रहती थी, वहां प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब सन्नाटा पसरा हुआ है.

वर्षों पुराने अवैध कब्जे हटाए गए

सड़क किनारे वर्षों से जमे ठेले, टीन शेड, झोपड़ीनुमा दुकानें और अवैध संरचनाओं को हटाए जाने के बाद पूरा इलाका खुला और व्यवस्थित दिखाई देने लगा है.

14 से 16 मई तक चला विशेष अभियान

अतिक्रमण हटाने के इस विशेष अभियान का नेतृत्व कर रहे सीओ संजय यादव ने बताया कि 14 से 16 मई तक लगातार अभियान चलाकर सड़क किनारे अतिक्रमण कर बैठे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई.

सड़क दुर्घटनाओं को बताया बड़ी वजह

उन्होंने कहा कि चौपारण में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण सड़क किनारे फैला अतिक्रमण भी रहा है. चतरा मोड़ के अलावा चैथी मोड़, केंदुआ मोड़ एवं महुदी मोड़ सहित अन्य स्थानों से भी चरणबद्ध तरीके से अतिक्रमण हटाया जाएगा.

पहले माइकिंग और नोटिस से दी गई थी चेतावनी

इससे पहले प्रशासन द्वारा माइकिंग और नोटिस के माध्यम से सड़क किनारे लगाए गए ठेले, टीन शेड और होटलों के बाहर फैलाई गई सामग्री को हटाने का निर्देश दिया गया था.

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अब शौचालय और पेयजल सुविधा की मांग

इधर, स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि जब चतरा मोड़ अब अतिक्रमण मुक्त हो ही गया है, तो यहां मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था भी जल्द सुनिश्चित होनी चाहिए.

यात्रियों को हो रही परेशानी

लोगों का कहना है कि बस पड़ाव पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों का आना-जाना होता है, लेकिन सुलभ शौचालय और पेयजल की सुविधा नहीं होने से महिलाओं, बुजुर्गों और यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है.

ओवरब्रिज के पिलरों का लेना पड़ता है सहारा

लोगों ने मांग की कि शीघ्र सार्वजनिक शौचालय और पेयजल की व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को मजबूरी में ओवरब्रिज के पिलरों का सहारा नहीं लेना पड़े.

कार्रवाई के बाद गरीब परिवारों की बढ़ी चिंता

हालांकि, इस कार्रवाई के बीच एक मानवीय पहलू भी सामने आया है. सड़क किनारे वर्षों से ठेला, झोपड़ी और छोटी दुकानों के सहारे अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले कई गरीब परिवार अब चिंता में हैं.

रोजी-रोटी पर पड़ा असर

किसी का ठेला हट गया, तो किसी की झोपड़ीनुमा दुकान टूट गई. कई परिवारों की रोजी-रोटी पूरी तरह इन्हीं छोटे कारोबारों पर निर्भर थी.

पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार की मांग

ऐसे में स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ गरीब परिवारों के पुनर्वास एवं वैकल्पिक रोजगार की दिशा में भी संवेदनशील पहल की जाए, ताकि व्यवस्था सुधारने के साथ किसी गरीब का चूल्हा भी ठंडा न पड़े.

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