New Delhi: हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल 25 जुलाई को देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी के साथ चातुर्मास की शुरुआत होगी. इसके साथ ही विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार, मुंडन समेत कई मांगलिक कार्यों पर कुछ महीनों के लिए रोक लग जाएगी.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक विश्राम करते हैं. इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है. इस दौरान सनातन परंपरा में शुभ और मांगलिक संस्कारों को करना वर्जित माना जाता है.
शादी-विवाह की तैयारियों पर पड़ेगा असर
चातुर्मास शुरू होने के बाद जिन परिवारों में विवाह, गृह प्रवेश या अन्य शुभ कार्यक्रमों की योजना है, उन्हें नए शुभ मुहूर्त का इंतजार करना होगा. इसका असर शादी से जुड़े कारोबार पर भी देखने को मिलेगा.होटल, बैंक्वेट हॉल, धर्मशाला, टेंट हाउस, कैटरिंग, फूल कारोबार और पंडितों की बुकिंग जैसे कामों में कुछ समय के लिए कमी आने की संभावना है.
नवंबर से शुरू होंगे शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार अधिकमास और ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण शुभ मुहूर्त सीमित रहेंगे. विवाह और मुंडन जैसे संस्कारों के लिए नवंबर 2026 से शुभ समय शुरू होगा.ज्योतिषाचार्य पं. सुरेश शास्त्री भट्ट के अनुसार विवाह और मुंडन के लिए नवंबर 2026 से जुलाई 2027 के बीच कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे. वहीं उपनयन संस्कार के लिए लोगों को फरवरी 2027 तक इंतजार करना पड़ सकता है.
धार्मिक आयोजनों की बढ़ेगी रौनक
मांगलिक कार्यों पर भले ही विराम रहेगा, लेकिन चातुर्मास के दौरान धार्मिक आयोजनों का महत्व बढ़ जाता है. कथा, भागवत, रुद्राभिषेक, पूजा-पाठ और जप-तप जैसे धार्मिक कार्यक्रमों में तेजी आती है. धार्मिक नगरी हरिद्वार में भी इस दौरान श्रद्धालुओं की गतिविधियां बढ़ेंगी. कांवड़ यात्रा और चारधाम यात्रा के चलते धार्मिक माहौल बना रहेगा.
21 नवंबर से फिर शुरू होंगे शुभ कार्य
मान्यता के अनुसार 21 नवंबर को हरिप्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागने के बाद मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी. इसके बाद शादी-विवाह और अन्य शुभ संस्कारों का दौर फिर शुरू हो जाएगा.
ALSO READ: कोडरमा: चंदवारा में तेज रफ्तार बाइक की चपेट में आने से 70 वर्षीय बुजुर्ग घायल, सदर अस्पताल रेफर
