बिहार की बंद चीनी मिलों को मिलेगा नया जीवन, सरकार ने बदला कानून, नवंबर 2026 से शुरू होगी पेराई

Bihar: बिहार में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा...

chini mill

Bihar: बिहार में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने बिहार चीनी उपक्रम (अधिग्रहण) अधिनियम, 1985 में संशोधन कर दिया है. इस बदलाव के बाद बंद चीनी मिलों की जमीन निजी निवेशकों और सहकारी समितियों को हस्तांतरित की जा सकेगी. सरकार का मानना है कि इससे राज्य के चीनी उद्योग को नई गति मिलेगी और गन्ना किसानों के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को भी लाभ होगा.

निवेशकों के लिए खुला रास्ता

अब तक बंद चीनी मिलों की जमीन बिहार राज्य चीनी विकास निगम के स्वामित्व में थी. पुराने कानून के तहत इन मिलों का संचालन केवल राज्य सरकार ही कर सकती थी, जिसके कारण निजी निवेश और जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया अटकी हुई थी. विधि विभाग ने भी स्वामित्व बदले बिना जमीन सौंपने पर आपत्ति जताई थी. कानून में संशोधन के बाद यह बाधा दूर हो गई है और अब निवेशकों के लिए रास्ता साफ हो गया है.

पहले चरण में तीन मिलें होंगी चालू

सरकार ने पहले चरण में मधुबनी की सकरी, दरभंगा की रैयाम और गोपालगंज की सासामूसा चीनी मिल को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है. इन मिलों में नवंबर 2026 से गन्ने की पेराई शुरू कराने का लक्ष्य तय किया गया है.

सकरी और रैयाम का संचालन सहकारिता विभाग करेगा

सकरी और रैयाम चीनी मिलों का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा. वहीं, सासामूसा चीनी मिल के लिए निवेशक चयन की प्रक्रिया जारी है. सरकार ने अन्य बंद चीनी मिलों के संचालन के लिए भी निजी निवेशकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं.

‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ अभियान को मिलेगी मजबूती

राज्य सरकार सात निश्चय-3 के तहत ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ अभियान को आगे बढ़ा रही है. इसी योजना के अंतर्गत चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने, गन्ना आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. गन्ना उद्योग विभाग नई चीनी मिलों की स्थापना, आधुनिक तकनीक के उपयोग, निवेश बढ़ाने, गन्ना उत्पादन क्षेत्र के विस्तार और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है.
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हाई लेवल कमेटी करेगी निगरानी

पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है. यह समिति निवेश प्रस्तावों और विभिन्न परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर रही है, ताकि बंद चीनी मिलों का संचालन जल्द से जल्द शुरू किया जा सके.

एनएफसीएसएफ ने तैयार की फिजिबिलिटी रिपोर्ट

राज्य सरकार और सहकारिता विभाग ने राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ (एनएफसीएसएफ), नई दिल्ली के साथ समझौता किया है. इसके तहत सकरी और रैयाम चीनी मिलों की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का अध्ययन कराया गया. एनएफसीएसएफ दोनों मिलों की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर चुका है. हाल ही में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन दोनों मिलों के संचालन के लिए इंडियन पोटाश लिमिटेड से भी प्रस्ताव मांगे गए हैं.

किसानों और युवाओं को होगा लाभ

सरकार का कहना है कि बंद चीनी मिलों के दोबारा शुरू होने से गन्ना किसानों को अपनी फसल का बेहतर बाजार मिलेगा. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बिहार का चीनी उद्योग एक बार फिर विकास की राह पर लौट सकेगा.

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