Ranchi: पर्यावरण असंतुलन और इसके गंभीर परिणामों को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बेहद बेबाक अंदाज में चिंता जताई है. खेलगांव स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए सीएम ने साफ कहा कि प्रकृति से छेड़छाड़ का खामियाजा समाज के हर वर्ग को भुगतना होगा.
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर सीधी बात
मुख्यमंत्री ने झारखंड में तेजी से बदलते पर्यावरण और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर बात करते हुए कहा कि जंगलों के कटने से हाथी अब शहरों का रुख कर रहे हैं. उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी, “जब हम हाथियों के घर में घुस जाएंगे, तो वे भी हमारे घर में घुसेंगे. उन्होंने अमीरी के भ्रम में जीने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह सोचना बिल्कुल गलत है कि पैसा, गाड़ी और ऐशो-आराम होने से प्राकृतिक आपदाओं या पर्यावरण के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है प्रकृति के नियमों के आगे हर कोई समान है.


सम्मानित किए गए वन प्रहरी और हाथी मित्र
इस गरिमामयी समारोह के दौरान पर्यावरण संरक्षण और वनों की सुरक्षा में अहम योगदान देने वाले लोगों का उत्साहवर्धन किया गया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने संयुक्त रूप से तेंदूपत्ता वन समितियों के सदस्यों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों,ग्रा म वन प्रबंधन समितियों, तथाहाथी मित्रों को सम्मानित किया.
100 पेड़ लगाओ, 1,000 यूनिट बिजली फ्री पाओ का ऑफर, कोई लेने को तैयार नहीं : सीएम
वन महोत्सव के दौरान सीएम ने कहा कि जो व्यक्ति एक पेड़ लगाएगा, उसे 5 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी. यदि कोई 100 पेड़ लगाता है, तो वह 1,000 यूनिट बिजली मुफ्त ले सकता है. हालांकि, सीएम ने अफसोस जताया कि इस लाभकारी योजना के बावजूद लोग आगे आने को तैयार नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों से अपने घर के परिसर में कम से कम एक फलदार पौधा जरूर लगाने की अपील की. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पौधे पर रोपण की तारीख जरूर अंकित करें. भावनात्मक जुड़ाव का जिक्र करते हुए उन्होंने विश्वास दिलाया कि मैं सत्ता में रहूं या ना रहूं, आपके द्वारा लगाए गए उस पेड़ को देखने जरूर आऊंगा.

