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कोडरमा : 12 अगस्त को वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण, रक्षाबंधन पर भी चंद्र ग्रहण का साया

Koderma : आगामी 12 अगस्त 2026 बुधवार को श्रावण कृष्ण अमावस्या हरियाली अमावस्या के दिन वर्ष का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण...

Koderma : आगामी 12 अगस्त 2026 बुधवार को श्रावण कृष्ण अमावस्या हरियाली अमावस्या के दिन वर्ष का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगेगा. पं. कुंतलेश पाण्डेय के अनुसार यह पूर्ण (खग्रास) सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और सामान्य पूजा-पाठ व धार्मिक गतिविधियां पूर्ववत जारी रहेंगी.

पं. पाण्डेय ने बताया कि अगस्त 2026 में महज 15 दिनों के भीतर दो बड़े ग्रहण पड़ रहे हैं. पहला सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को और दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त शुक्रवार को रक्षाबंधन के दिन लगेगा. सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि दोनों ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगें जिस कारण सूतक भी मान्य नहीं होगा. उनके अनुसार 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण रात्रि 9:04 बजे से प्रारंभ होकर 1:27 बजे तक रहेगा. ग्रहण की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 23 मिनट होगी. भारत में ग्रहण के समय सूर्य अस्त होने के कारण इसे देखा नहीं जा सकेगा.

ग्रहण और सूतक को लेकर जानें पूरी जानकारी

पं कुंतलेश पाण्डेय के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त सुबह 9:09 बजे से 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा. इसी दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी लगेगा, लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा. ग्रहण का समय सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा.

हालांकि, यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन पर ग्रहण का कोई अशुभ प्रभाव नहीं माना जाएगा. भाई के कलाई पर बहनें के राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 28 अगस्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक है इसमें बाद राहुकाल लगेगा जो 10:13 से 11:49 तक रहेगा इस दौरान बहनें अपने भाइयों का राखी न बढ़ें. हालांकि राहुकाल छोड़ कर सूर्योदय के अनुसार बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी दिन भर बांध सकती है.

रक्षाबंधन 2026 पर नहीं रहेगा भद्रा और ग्रहण का साया

भद्रा की बात करें तो भद्रा 27 अगस्त को 09:10 सुबह से रात 09:34 तक है जबकि 27 को पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 09:09 बजे से लेकर 28 अगस्त 09:48 तक रहेगी. अतः भद्रा 27अगस्त की रात्रि को ही समाप्त हो जाएगा. वहीं रक्षाबंधन पर ग्रहण का साया भी नहीं रहेगा. उन्होंने बताया कि ग्रहण के समय कर्क राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध और उच्च राशि के बृहस्पति की विशेष स्थिति रहेगी और सूर्य केतु से ग्रसित होंगे. ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा.

इन राशियों को मिलेगा विशेष लाभ

पं. पाण्डेय के अनुसार वृष, कन्या, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण शुभफलदायी रहेगा. रुके हुए कार्य पूरे होने, आर्थिक लाभ मिलने, नई योजनाओं में सफलता और कार्यक्षेत्र में उन्नति के योग बनेंगे.

इन राशियों को बरतनी होगी सावधानी

वहीं कर्क, सिंह और धनु राशि के जातकों को स्वास्थ्य, अनावश्यक खर्च, पारिवारिक तनाव और महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है. इसके अलावा मेष, मिथुन, वृश्चिक, मकर और मीन राशि के जातकों को भी अपनी-अपनी परिस्थितियों के अनुसार सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई गई है.

ग्रहण काल में करें मंत्र जाप और दान

पं. कुंतलेश पाण्डेय ने बताया कि ग्रहण काल में मंत्र जाप, ध्यान और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है. अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र, गायत्री मंत्र तथा ॐ आदित्याय नमः मंत्र का जाप लाभकारी माना गया है. जिन राशियों पर ग्रहण का प्रतिकूल प्रभाव बताया गया है, उन्हें ग्रहण के दिन गुड़, गेहूं और सफेद वस्तुओं का दान करने तथा सूर्य को अर्घ्य देने की सलाह दी गई है. उन्होंने बताया कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जबकि यूरोप के अधिकांश देशों, कनाडा, रूस तथा उत्तर-पश्चिम अफ्रीका के कई क्षेत्रों में इसे देखा जा सकेगा.

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