Ranchi: जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिर रहे हों और देश के भीतर पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हों, तो विरोध का तरीका भी खास होना चाहिए. राजधानी रांची की सड़कों पर मंगलवार की शाम कुछ ऐसा ही नजारा दिखा. झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार की जनविरोधी आर्थिक नीतियों को कटघरे में खड़ा करते हुए पूरे राज्य में एक व्यापक और आक्रामक हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की.

गजब रहा तांगा मार्च
शाम ठीक पांच बजे रांची का कांग्रेस भवन एक अलग ही सियासी रंग में रंगा नजर आया. पारंपरिक वाहनों को दरकिनार कर कांग्रेस कार्यकर्ता घोड़ा गाड़ी (तांगे) के साथ जुलूस की शक्ल में सड़कों पर उतर आए. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में यह अनूठा विरोध मार्च शहीद चौक और अल्बर्ट एक्का चौक होते हुए लालपुर पेट्रोल पंप पहुंचा. इस दौरान सड़कों पर राहगीरों और आम जनता का हुजूम भी इस विरोध का गवाह बना.
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नीतियों से त्रस्त जनता, पेट्रोल पंप बने विरोध के केंद्र
लालपुर पेट्रोल पंप पर खुद प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने पहला हस्ताक्षर कर इस राज्यव्यापी अभियान का शंखनाद किया. इसके साथ ही रांची के रातू रोड, कचहरी रोड, हरमू रोड, डोरंडा और बिरसा चौक जैसे प्रमुख इलाकों के पेट्रोल पंपों पर आम नागरिकों, युवाओं, महिलाओं और व्यापारियों ने बढ़-चढ़कर अपनी कलम से केंद्र सरकार के खिलाफ गुस्सा दर्ज कराया. प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो ने बेहद तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने पेट्रोल और डीजल को आम जनता की जरूरत नहीं, बल्कि अपनी तिजोरी भरने की अंधाधुंध कमाई का जरिया बना लिया है. ईंधन के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट सेक्टर पूरी तरह तबाह हो चुका है. इसका सीधा असर थाली पर पड़ा है. दूध, सब्जी, दाल और रोजमर्रा की चीजें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो रही हैं. देश का किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग पिस रहा है और देश के प्रधानमंत्री सैरसपाटे में व्यस्त हैं.
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यह सिर्फ विरोध नहीं, जनता के सब्र का इम्तिहान है
इस मौके पर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की शोषित जनता की सामूहिक आवाज है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पेट्रोल पंपों पर उमड़ रही आम लोगों की भीड़ इस बात का सुबूत है कि जनता अब मौजूदा नीतियों से ऊब चुकी है. आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उग्र रूप अख्तियार करेगा और दिल्ली दरबार को जनता की आवाज सुनने पर मजबूर होना पड़ेगा. इस महा-अभियान को जमीन पर उतारने में प्रदीप तुलस्यान, सुनीत शर्मा, रविन्द्र सिंह, राकेश सिन्हा, सतीश पॉल मुंजनी, अभिलाष साहू और सूर्यकांत शुक्ला समेत सैकड़ों वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाला.
