ग्राम सभा की अनदेखी पर भड़के ग्रामीण, बालू टेंडर रद्द करने की मांग को लेकर डीसी कार्यालय पहुंचे जनप्रतिनिधि

Khunti: जिले में ग्राम सभा की अनुमति के बिना बालू खनन टेंडर जारी किए जाने के विरोध में सोमवार को ग्रामीणों और...

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डीसी कार्यालय पहुंचे जनप्रतिनिधि व ग्रामीण

Khunti: जिले में ग्राम सभा की अनुमति के बिना बालू खनन टेंडर जारी किए जाने के विरोध में सोमवार को ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा. तोरपा प्रखंड के उप प्रमुख, ग्राम प्रधान, मुखिया समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा. प्रदर्शनकारियों ने बालू खनन टेंडर पर तत्काल रोक लगाने की मांग की.

बिना ग्राम सभा की सहमति के बालू घाटों का टेंडर किया गया जारी

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों की अनदेखी करते हुए बिना ग्राम सभा की सहमति के बालू घाटों का टेंडर जारी कर दिया. आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ग्राम सभा अध्यक्ष वीरेंद्र धान ने कहा, कि ग्राम सभा की लिखित अनुमति के बिना इलाके से “एक गाड़ी बालू भी उठाने नहीं दिया जाएगा.” प्रदर्शन में शामिल ग्राम प्रधान कलिया मुंडा ने आरोप लगाया कि नदियों से लगातार अवैध तरीके से जेसीबी और भारी वाहनों के जरिए बालू उठाव किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों को घर बनाने तक के लिए बालू नहीं मिल रहा, जबकि बड़े पैमाने पर बाहरी क्षेत्रों में इसकी सप्लाई की जा रही है.

वहीं महिला मुखिया अगाथा भेंगरा ने कहा कि अंधाधुंध बालू खनन से इलाके का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है. इससे खेती-किसानी प्रभावित हो रही है और ग्रामीणों के सामने पानी का संकट गहराता जा रहा है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ग्राम सभा की मंजूरी के बिना किसी भी कीमत पर बालू खनन स्वीकार नहीं किया जाएगा.

प्रशासन पर नियमों को ताक पर रखने का आरोप

तोरपा प्रखंड उप प्रमुख संतोष कर ने प्रशासन पर नियमों को ताक पर रखने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पहले टेंडर जारी कर दिया गया और अब ग्राम सभा से सहमति लेने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जो ग्रामीणों को गुमराह करने की कोशिश है. उन्होंने कहा कि अनियंत्रित बालू उठाव के कारण नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है और नदी किनारे बसे किसानों की जमीन कटाव से बर्बाद हो रही है.

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की कि ग्राम सभा की लिखित अनुमति के बिना किसी भी प्रकार के खनन और भारी वाहनों के परिचालन पर तत्काल रोक लगाई जाए. साथ ही पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के उल्लंघन के आरोप में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच कर कार्रवाई की जाए.
इधर, मामले को लेकर उपायुक्त मोहम्मद जावेद हुसैन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वे जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक में व्यस्त बताए गए. वहीं जिला खनन पदाधिकारी रामनरेश सिंह से भी संपर्क नहीं हो सका.

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