रांची: झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सालों से चल रही मनमानी नियुक्तियों और वित्तीय ढिलाई के खेल पर राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने पूर्णविराम लगा दिया है. राजभवन ने कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल तृतीय और चतुर्थ वर्ग की संविदा बहाली पर तत्काल रोक लगा दी है, बल्कि पिछले तीन वर्षों के दौरान हुई ऐसी सभी नियुक्तियों का कच्चा चिट्ठा भी सात दिनों के भीतर तलब किया है.
बहाली का नया सिस्टम
अब विश्वविद्यालय अपनी मर्जी से संविदा कर्मी नियुक्त नहीं कर पाएंगे. यदि नियुक्ति अनिवार्य है, तो उन्हें राज्य सरकार की एजेंसी जैप आइटी द्वारा सूचीबद्ध संस्थाओं के जरिए ही मैनपावर लेना होगा। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि कुलपति के विशेष कार्य पदाधिकारी जैसा कोई पद सृजित ही नहीं है, इसलिए इस पद पर तैनात लोगों को तुरंत उनके मूल विभाग में भेजने और उनके भत्तों पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है.
बैंक खातों पर कैश कंट्रोल
विश्वविद्यालयों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी कोई भी राशि करेंट एकाउंट (चालू खाता) में नहीं रखेंगे. सरकारी पैसे का अधिकतम लाभ लेने के लिए इसे सेविंग या फिक्स डिपॉजिट में रखना होगा, जहां ब्याज दरें सबसे अधिक हों. शिक्षकों और कर्मियों द्वारा पूर्व में लिए गए अग्रिम का समायोजन कर 30 अप्रैल तक लोकभवन को सूचित करने का अल्टीमेटम दिया गया है.
ये किया गया बड़ा बदलाव
वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट अब केवल सीनेट या सिंडिकेट से पास करना काफी नहीं होगा; इसकी एक कॉपी लोकभवन (राजभवन) को भी भेजनी होगी, ताकि खर्चों की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके.
