DC साहब… नहीं है आपके जिलों में पर्याप्त डीजल-पेट्रोल, अगर ना हो हमारी बात पर भरोसा, तो हमारी तरह रांची से बोकारो घूम आएं…

Dheeraj Kumar Ranchi: आए दिन झारखंड के सभी डीसी साहब अपने पीआर के माध्यम से पत्रकारों तक यह सुनिश्चित कराते हैं कि...

Dheeraj Kumar

Ranchi: आए दिन झारखंड के सभी डीसी साहब अपने पीआर के माध्यम से पत्रकारों तक यह सुनिश्चित कराते हैं कि ‘पैनिक ना करें, आपके जिले में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और डीजल है.’ NewsWave Jharkhand की टीम एक ऑफिशियल टूर पर निकली. रांची से तीन जिलों को पार करते हुए बोकारो जाना था. गलती से हमारा वाहन डीजल इंजन वाला था. गाड़ी पर बैठते ही मैंने अपने सहयोगी से पूछा कि ‘भाई गाड़ी में तेल है ना.’ उसने भी बड़े तेवर से कहा ‘चलिए ना भैया, रास्ता में ले लेंगे.’ मेरे सहयोगी का दावा था कि पब्लिक बिना बात की पैनिक कर रही है. हर जिला के डीसी साहब रोज बोल रहे हैं कि पैनिक ना हो, फिर भी. बस इन्हीं बातों के साथ हम लोग रांची के रिंग रोड पर चढ़ गए.

पछताने का दौर हुआ शुरू

रिंग रोड पर चढ़ते ही जो सबसे पहला पेट्रोल पंप मिला, वहां गाड़ी स्लो की, देखा कि पेट्रोल पंप को बांस और बल्ली से घेर कर बंद कर दिया गया गया है. तो लगा कि चलो कुछ तकनीकी खराबी होगी, शायद इसलिए पंप बंद है. आगे बढ़ा तो लगातार तीन पंप का ऐसा ही हाल था. ओरमांझी से सिकदरी की तरफ गाड़ी मुड़ी. तो एक पंप खुला हुआ दिखायी दिया. जोर से हॉर्न बजाते हुए पंप में दाखिल हुए. लेकिन गाड़ी पंप में इंट्री करने से पहले ही वहां के एक कर्मी पर नजर पड़ी. वो जोर-जोर सो हाथ हिलाकर ‘ना’ कर रहा था. इशारे से बता रहा था कि पंप में तेल नहीं है. गाड़ी में बैठे सभी सहयोगी एक दूसरे का मुंह देखने लगे. फिर सभी तेल की मीटर को झांकने के लिए अपनी-अपनी सीट से थोड़ा ऊपर उठे. मीटर की तरफ झुके. सब देखने की कोशिश करने लगे कि तेल बचा कितना है. बोकारो पहुंच पाएंगे भी या नहीं. तेल के मीटर में कुछ जान बाकी थी. फिर से आगे बढ़े. सिकदरी से उतरे और एनएच पर गाड़ी आयी. रांची के बाद रामगढ़ जिले के कई पेट्रोल पंप पर रुक-रुक कर तेल के लिए गुहार लगायी फिर भी तेल नहीं सिर्फ ना मिला.

पता नहीं था कि तेल के लिए सिर्फ पैसा नहीं, मिन्नत भी लगेगी

बोकारो जिला में प्रवेश करने से पहले रामगढ़ जिले के एक पंप पर गाड़ी रुकी. सभी पंप के कर्मी को देख रहे थे कि कोई मना तो नहीं कर रहा था. जब नोजल के पास गाड़ी पहुंची, तो पंप कर्मी ने कहा कि तेल तो है, लेकिन सिर्फ पांच सौ रुपए का ही देंगे. हमलोग बारी-बारी से पंप कर्मी को मिन्नत करने लगे. तब जाकर वो पंद्रह सौ का तेल देने को राजी हुआ. हमलोगों की जान में जान आयी. गाड़ी बोकारो पहुंची. अपना काम खत्म करने के बाद सीधा बोकारो एयरपोर्ट (जहां से कोई फ्लाइट नहीं उड़ता) के पास के पंप पर पहुंचे. तब जाकर टंकी फुल हुआ. बोकारो से रांची आने के बाद मैं सीधा अपनी गाड़ी को लेकर एक पंप पर पहुंचा और सबसे पहले गाड़ी की टंकी फुल करायी.

तो ऐसा है, डीसी साहबों आप लोगों को गुमराह ना करें, सच बता दें कि डीजल और पेट्रोल की कमी है. चाहे वो किसी भी वजह से हो. नहीं तो कई लोग रास्ते में ही लटक जाएंगे.

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