Ranchi: झारखंड के सूचना आयुक्त शिवपूजन पाठक का सूचना आयोग जैसे संवैधानिक और निष्पक्ष संस्थान में महत्वपूर्ण पद संभालने के बावजूद भाजपा से जुड़ाव पूरी तरह खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. मामला इस बात को लेकर गरमाया हुआ है कि सूचना आयुक्त बनने के बाद भी शिवपूजन पाठक भाजपा के ऑफिशियल प्रदेश मीडिया व्हाट्सएप ग्रुप में न सिर्फ मौजूद हैं, बल्कि उसके एडमिन की भूमिका भी निभा रहे हैं. सूचना आयुक्त नियुक्त होने से पहले शिवपूजन पाठक भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहे हैं. पद संभालने के बाद उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और संगठनात्मक दायित्वों से इस्तीफा दे दिया, लेकिन भाजपा से जुड़े डिजिटल मंचों से उनकी दूरी अब तक नहीं दिख रही है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों से खुद को अलग कर लिया है, तो फिर भाजपा के ग्रुप में उनकी सक्रिय मौजूदगी और एडमिन की भूमिका क्यों बरकरार है?
सूचना आयोग का पद राजनीतिक तटस्थता का प्रतीक माना जाता है
सूचना आयोग का पद निष्पक्षता, स्वतंत्रता और राजनीतिक तटस्थता का प्रतीक माना जाता है. सूचना का अधिकार अधिनियम की मूल भावना भी यही है कि आयोग से जुड़े पदाधिकारी किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त रहें, ताकि आम जनता का भरोसा आयोग की निष्पक्षता पर बना रहे. ऐसे में किसी राजनीतिक दल से जुड़े ग्रुप में सूचना आयुक्त की सक्रिय भूमिका कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है.




