Ranchi: उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक और धांधली मामले में तीन आरोपियों कृष्णा कुमार, आदित्य उर्फ मोनू कुमार और सोनू शर्मा की अग्रिम जमानत (एबीपी) याचिका पर 9 और 10 जुलाई को सुनवाई होगी. कृष्णा कुमार के मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से समय मांगा गया था, जबकि आदित्य उर्फ मोनू कुमार और सोनू शर्मा के मामले में एलसीआर (लोअर कोर्ट रिकॉर्ड) अदालत में प्रस्तुत नहीं होने के कारण सुनवाई की नई तिथि निर्धारित की गई. मामले की सुनवाई अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में हुई.
मास्टरमाइंड समेत आठ सदस्य और पांच अभ्यर्थी अब भी जेल में
मामले के मास्टरमाइंड अतुल वत्स तथा गिरोह के सदस्य विकास कुमार, आशीष कुमार, योगेश कुमार, मुकेश कुमार और बिहार से गिरफ्तार तीन अन्य सदस्य समेत कुल आठ आरोपी अब भी जेल में बंद हैं. इनके अलावा पांच अभ्यर्थी भी न्यायिक हिरासत में हैं. इनकी जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई होनी है.

क्या है पूरा मामला
उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा 13 अप्रैल को आयोजित होनी थी. आरोप है कि परीक्षा से एक दिन पहले 12 अप्रैल की रात अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर रटवाए जा रहे थे. मामले में तमाड़ पुलिस ने रड़गांव से अभ्यर्थियों समेत कुल 166 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. इनमें सरगना समेत पांच मास्टरमाइंड, सात महिलाएं और 152 अभ्यर्थी शामिल थे.
83 जमानत याचिकाएं दाखिल, 78 आरोपियों को मिली राहत
मामले में 83 जमानत याचिकाएं दाखिल की गई थीं. इनमें से 78 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आरोपियों को जमानत मिल चुकी है. सुनवाई के दौरान अदालत ने केस डायरी तलब की थी, लेकिन तमाड़ पुलिस तीन बार केस डायरी प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिसके कारण सुनवाई टलती रही. बाद में अदालत द्वारा अंतिम अवसर दिए जाने के बाद केस डायरी प्रस्तुत की गई, जिसके आधार पर आरोपियों को जमानत मिली.
रड़गांव के नर्सिंग कॉलेज में हुआ था बड़े रैकेट का खुलासा
तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज में पुलिस की छापेमारी के दौरान इस बड़े पेपर लीक रैकेट का खुलासा हुआ था. जांच में सामने आया कि परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर रटवाए जा रहे थे और संगठित गिरोह इस धांधली को अंजाम दे रहा था. आरोप है कि अभ्यर्थियों से परीक्षा से पहले तीन लाख रुपये और नियुक्ति के बाद 10 लाख रुपये लेने का सौदा तय किया गया था. हालांकि रड़गांव में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने पर ग्रामीणों को नक्सली या आपराधिक गतिविधियों की आशंका हुई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी और पूरे मामले का खुलासा हुआ.


