SAURAV SINGH
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट के पिछले दो दिनों के भीतर आए तीन फैसलों ने राज्य पुलिस महकमे की पूरी तस्वीर बदल कर रख दी है. इन तीन प्रमुख फैसलों का असर डीएसपी से लेकर सिपाही स्तर तक के कर्मियों पर पड़ा है. कहीं जश्न का माहौल है, तो कहीं डिमोशन की कड़वाहट है. इन फैसलों ने न केवल सालों से चली आ रही वरीयता सूची को पलट दिया है, बल्कि प्रोन्नति के नियमों पर भी नई कानूनी लकीर खींच दी है. पढ़े न्यूज वेव झारखंड की पूरी रिपोर्ट.

DSP वरीयता सूची में भारी उलटफेर: जूनियर बने सीनियर, 9 अधिकारी हुए डिमोट
झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए डीएसपी रैंक के अधिकारियों की नई वरीयता सूची जारी की है. इस फैसले ने चौथे बैच के अधिकारियों के करियर ग्राफ को पूरी तरह बदल दिया है. रिट याचिका संख्या W.P.(S) No. 2297/2020 पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया था कि वरीयता का निर्धारण 2010 के जेपीएससी (JPSC) विज्ञापन के आधार पर मिली मेरिट लिस्ट के अंकों के अनुसार होना चाहिए. कोर्ट ने 2016, 2017, 2018 और 2024 में विभाग द्वारा बनाई गई अनंतिम सूचियों को रद्द कर दिया. नई सूची जारी होने से नौ डीएसपी अधिकारियों को सीनियर डीएसपी के पद पर प्रोन्नति मिल गई है. वहीं, दूसरी ओर नौ अधिकारी जो अब तक सीनियर माने जा रहे थे, उन्हें वापस अपनी मूल कोटि में भेज दिया गया है यानी वे डिमोट हो गए हैं.
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दारोगा से इंस्पेक्टर बनने की रेस पर लगा ब्रेक
राज्य के सैकड़ों सब इंस्पेक्टर जो इंस्पेक्टर बनने का सपना देख रहे थे, उन्हें हाईकोर्ट के एक अंतरिम आदेश से तगड़ा झटका लगा है. जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर के पद पर होने वाली प्रोन्नति प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. यह मामला 2017 में हुई दारोगा बहाली की दो अलग-अलग नियुक्तियों और उनकी आपसी वरीयता के विवाद से जुड़ा है. अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से प्रमोशन की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी. कोर्ट के इस स्थगन आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय में खलबली है, क्योंकि बड़ी संख्या में पदोन्नति की फाइलें अंतिम चरण में थीं. अब इस मामले में अंतिम फैसले का इंतजार है.
सिपाहियों के हक में बड़ा फैसला: 2017 बैच के जवानों को मिला लाभ
सिपाही से सहायक अवर निरीक्षक बनने की राह देख रहे जवानों के लिए हाईकोर्ट से बड़ी राहत की खबर आई है. कोर्ट ने साफ किया कि नियमों में बदलाव पिछली तारीख से लागू नहीं किए जा सकते. पुलिस नियमावली में संशोधन कर ‘660-ग’ जोड़ा गया था, जिसके तहत सिपाही को पहले हवलदार और फिर एएसआई बनने का प्रावधान था. साथ ही दो अलग-अलग प्रशिक्षणों की शर्त जोड़ी गई थी. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह नया नियम केवल संशोधन के बाद हुई नियुक्तियों पर लागू होगा. पुरानी नियुक्तियों (विशेषकर 2017 बैच) पर पुराने नियम ही चलेंगे, जिसमें सिपाही सीधे ASI बन सकते हैं और उन्हें केवल एक ही प्रशिक्षण (पीटीसी) की आवश्यकता है. इस फैसले से 2017 बैच के हजारों सिपाहियों को सीधा फायदा पहुंचा है. अब उनके प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है, जिससे सिपाही वर्ग में खासा उत्साह है.
