SAURAV SINGH
Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंकने के सनसनीखेज मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी अमन अंसारी उर्फ गोलू ने पुलिस के समक्ष अपना गुनाह कबूल कर लिया है. आरोपी ने उस पूरी साजिश का पर्दाफाश किया है, जिसके तार दुबई, पंजाब, झारखंड और उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए हैं. पैसों की तंगी और लालच में आकर रची गई इस खौफनाक साजिश का अंतिम मकसद झारखंड में बड़ी सांप्रदायिक घटना को अंजाम देने के बाद उत्तर प्रदेश के कानपुर और लखनऊ में सिलसिलेवार धमाके करना था.
लॉकडाउन में छूटी थी पढ़ाई, दुबई में की नौकरी
पुलिस हिरासत में दिए बयान के अनुसार, मुख्य आरोपी अमन अंसारी उर्फ गोलू (उम्र करीब 21 वर्ष) मूल रूप से सेरक थाना व जिला लातेहार का रहने वाला है, लेकिन वर्तमान में वह न्यू आजाद बस्ती, लोहरदगा में रह रहा था. अमन ने बताया कि जब वह ग्रेटर त्रिवेणी स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ रहा था, तभी उसके पिता स्व. सनीफ मियाँ की बीमारी से मृत्यु हो गई. इसके बाद उसकी मां ने लोहरदगा निवासी नसीम खान से दूसरी शादी कर ली. आठवीं कक्षा के दौरान ही वर्ष 2020 में कोविड लॉकडाउन के कारण उसकी पढ़ाई छूट गई. वर्ष 2022 में घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह कमाने के लिए मुंबई चला गया. वहां उसने नागपाड़ा में रहकर एसी बनाने का काम सीखा और प्रति माह 10-12 हजार रुपये कमाने लगा. वर्ष 2024 में मुंबई के एक एजेंट जिशान शेख के माध्यम से वह विजिट वीजा पर ओमान गया, लेकिन काम न मिलने पर वापस आ गया. इसके बाद सितंबर 2025 में वह दोबारा मुंबई के रास्ते दुबई गया. दुबई की ‘मरमुम स्टार टेक्निकल सर्विस एलएलसी’ कंपनी में एसी मैकेनिक के रूप में उसे 35-40 हजार रुपये महीना मिलता था, जहां उसकी मुलाकात बिहार के सिवान के सुलेमान अंसारी, यूपी के आजमगढ़ के मो. आजम और केरल के सुपरवाइजर अहमद अली से हुई. वीजा समाप्त होने पर एक जनवरी 2026 को वह भारत लौट आया और भारत पेट्रोलियम में मजदूरी करने लगा.
राणा जी ने कहा तुम्हें पंजाब जाना होगा और वहां से हथियार लाना होगा
अमन अंसारी के मुताबिक, ईद के त्योहार पर जब वह मुंबई से अपने घर लोहरदगा आया हुआ था, तभी दुबई में उसके साथ काम करने वाले अहमद अली के जरिए आवेश राजपूत उर्फ राणा जी एवं सहजाद उर्फ शहनवाज आलम उर्फ भट्ठी को उसका फोन नंबर दिया गया. पांच जून को आवेश राजपूत उर्फ राणा जी ने व्हाट्सएप के माध्यम से अमन से संपर्क किया. राणा जी ने अमन को लालच देते हुए कहा दो-तीन लड़कों का उपाय करो और झारखंड में कुछ बड़ी घटना करवानी है, जिसके लिए तुम्हें पंजाब जाना होगा और वहां से हथियार लाना होगा. आगे मैं जैसे-जैसे बताऊंगा, वैसा काम करना है, जिसके बदले में तुम्हें अच्छा खासा पैसा दूंगा. आर्थिक तंगी से जूझ रहा अमन पैसों के लालच में आकर इस बड़ी आपराधिक साजिश में शामिल होने के लिए तैयार हो गया
साजिश का वित्तीय नेटवर्क और फर्जी सिम कार्ड का खेल
राणा जी ने पंजाब यात्रा के खर्च के लिए अमन से बैंक अकाउंट की मांग की. अमन ने लोहरदगा बस स्टैंड के पास ढोड़हा टोली स्थित सादीक रज्जा के मोबाइल दुकान का स्कैनर और अपने दोस्त सैफ अंसारी का स्कैनर राणा जी को भेजा. इन दोनों स्कैनर्स पर राणा जी ने पांच- पांच हजार रुपये भेजे. इसके अलावा, साजिश को अंजाम देने के लिए राणा जी ने एक नया व्हाट्सएप अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर की मांग की. अमन ने लोहरदगा में रहने वाले अपने दोस्त हैदर अली से एक गिरवी रखा हुआ मोबाइल और सिम कार्ड लिया, जिसका नंबर (9334314899) राणा जी को दिया गया। अमन द्वारा भेजे गए ओटीपी के जरिए राणा जी ने अपने पास उस नंबर का व्हाट्सएप चालू कर लिया, जिसका इस्तेमाल वह निर्देश देने के लिए करता था.
पंजाब दौरा किया लेकिन हथियार लाने की नाकाम रही कोशिश
राणा जी के निर्देश पर अमन अंसारी आठ जून को रांची से ‘टाटा अमृतसर ट्रेन’ से पंजाब के लिए रवाना हुआ. यात्रा के दौरान डाल्टनगंज स्टेशन पर एक सहयात्री उसका मोबाइल लेकर उतर गया, जिसे अमन ने वापस लिया और फिर दूसरी ट्रेन पकड़कर 10 जून को पंजाब के अमृतसर पहुंचा. वहां वह राजू मेहता के एक होटल में ठहरा (राजू मेहता का मोबाइल नंबर 8146903387 है). पंजाब में रहते हुए अमन ने लोहरदगा के अपने दो दोस्तो सैफ अंसारी उर्फ रोहित और सायम सुजान को भी व्हाट्सएप कॉल के जरिए इस काम में शामिल कर लिया, जो काम करने के लिए तैयार हो गए. 11 जून को राणा जी के निर्देश पर अमन अमृतसर के हुटर में हाईवे के पास ‘बीर’ नामक एक व्यक्ति से मिला, जिसने उसे गांजा उपलब्ध कराया, हालांकि, हथियार मिलने में देरी होने और योजना में बदलाव के कारण राणा जी ने व्हाट्सएप कॉल कर अमन को वापस झारखंड लौटने को कहा. अमन 12 जून को बस से दिल्ली होते हुए वापस लोहरदगा लौट आया.
मुख्य टारगेट था, रांची RSS कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला करना
लोहरदगा लौटने के बाद 15 जून की रात को आवेश राजपूत उर्फ राणा जी और सहजाद उर्फ भट्ठी ने अमन से व्हाट्सएप पर दोबारा संपर्क किया और उसे उसका मुख्य टारगेट बताया. उन्होंने निर्देश दिया कि रांची स्थित आरएसएस के कार्यालय पर बम फेंककर आग लगा देना है. इस काम को पूरा करने के एवज में तीनों आरोपियों (अमन, सैफ और सायम) को 50-50 हजार रुपये देने का वादा किया गया. राणा जी ने अमन के व्हाट्सएप पर आरएसएस कार्यालय की फोटो और उसका लोकेशन भी भेज दिया. योजना के मुताबिक, 16 जून की शाम करीब पांच बजे अमन और सैफ अंसारी ट्रेन से रांची पहुंचे. उन्होंने सायम सुजान को फोन कर बताया कि काम पूरा होने पर 50 हजार रुपये मिलेंगे. शाम सात बजे तीनों सायम सुजान के घर पर इकट्ठा हुए और वहां से लेक रोड पहुंचे. उन्होंने एक दुकान से पानी की खाली बोतल, 130 रुपये का पेट्रोल, लट्टू का फीता और एक झोला खरीदा.

होटल में पेट्रोल बम का निर्माण किया और हमले का लाइव वीडियो बनाया
सामान खरीदने के बाद तीनों आरोपी टुकटुक (ऑटो) से कांटा टोली स्थित ‘रॉयल इन होटल’ पहुंचे और अमन के आधार कार्ड का उपयोग कर एक हज़ार में कमरा नंबर 202 बुक किया. रात करीब नौ बजे राणा जी और भट्ठी ने व्हाट्सएप पर कॉल कर निर्देश दिया कि ‘आज रात में ही घटना को अंजाम देना है और घटना कारित करते समय का पूरा वीडियो बनाकर भेजना है. अमन द्वारा पेट्रोल बम बनाने की विधि पूछने पर राणा जी ने व्हाट्सएप पर एक गाइड वीडियो भेजा. वीडियो देखकर आरोपियों ने होटल के सामने पेट्रोल पंप के पास एक चौमीन दुकान से चिल्ली सॉस की खाली बोतल और एक अन्य कोल्डड्रिंक की बोतल का इंतजाम किया. तीनों ने मिलकर होटल के कमरे में दो पेट्रोल बम तैयार किए. चेहरा ढकने के लिए उन्होंने होटल के बेड रनर (हरा और उजला कपड़ा) और सफेद तौलिया का इस्तेमाल किया. 16 जून की रात करीब 11:00 बजे, सायम सुजान ने रैपिडो ऐप से एक सेंट्रो कार बुक की। तीनों कार में बैठकर तय योजना के अनुसार आरएसएस कार्यालय से करीब 50 मीटर पहले पहुंचे. सायम सुजान को कार घुमाकर नजर रखने के लिए कहा गया, जबकि अमन अंसारी और सैफ अंसारी एक-एक पेट्रोल बम लेकर गाड़ी से उतरे. सैफ अंसारी ने अपने मोबाइल से घटना का वीडियो बनाना शुरू किया और अमन अंसारी ने पहला पेट्रोल बम सीधे आरएसएस कार्यालय के ऊपर फेंक दिया,हालांकि, वह बम नहीं फटा. बम न फटने पर दोनों डरकर वापस कार के पास भागे. कार में बैठकर जब सायम सुजान ने फोन पर राणा जी को बताया कि बम नहीं फटा, तो राणा जी ने फोन पर कड़ी डांट लगाई और कहा जाओ, दूसरा बम फेंककर आओ. राणा जी की डांट के बाद अमन और सैफ दोबारा गाड़ी से उतरे, दूसरा पेट्रोल बम कार्यालय के ऊपर फेंका और तेजी से कार में आकर बैठकर वहां से भाग निकले. अमन ने इस पूरी घटना का बनाया गया वीडियो व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत आवेश राजपूत उर्फ राणा जी को भेज दिया.
साक्ष्य छुपाने की कोशिश और यूपी को दहलाने का अगला प्लान
वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों आरोपी वापस कांटा टोली स्थित होटल ‘रॉयल इन’ आए और सो गए. अगले दिन 17 जून की सुबह करीब दस बजे बजे उन्होंने होटल छोड़ दिया, लेकिन बेड रनर और तौलिया वहीं छोड़ आए. होटल से निकलने के बाद पकड़े जाने के डर से अमन और सैफ ने 150-150 रुपये में नए कपड़े खरीदे और अपने पुराने कपड़े सायम सुजान को दे दिए. सायम सुजान ने उन कपड़ों की गठरी बनाकर खादगढ़ा बस स्टैंड के पास निर्माणाधीन नगर निगम बिल्डिंग के पीछे प्लास्टिक के पोस्टर में लपेटकर छुपा दिया. इसके तुरंत बाद, मास्टरमाइंड आवेश राजपूत उर्फ राणा जी ने आरोपियों को झारखंड छोड़ने का नया फरमान सुनाया. राणा जी का निर्देश था कि वहां से निकलकर तुरंत कानपुर चले जाओ. कानपुर से लखनऊ जाकर दूसरी बड़ी घटना को अंजाम देना है, जिसे मैं बाद में बताऊंगा.
कोडरमा के पास दबोचे गए आरोपी, डिजिटल सबूत जब्त
राणा जी के निर्देश पर अमन अंसारी और सैफ अंसारी 17 जून को दोपहर करीब 2:45 बजे कानपुर जाने वाली ट्रेन में बैठ गए. ट्रेन अभी कोडरमा से आगे गझहंडी स्टेशन के पास ही पहुंची थी कि दोनों को अपने आसपास पुलिस की मौजूदगी और संदेह का अहसास हुआ. वे ट्रेन से उतरकर भागने की फिराक में थे, तभी चौकस पुलिस बल ने घेराबंदी कर दोनों को धर दबोचा. पुलिस ने आरोपियों के पास से उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं. अमन अंसारी ने अपने स्वीकारोक्ति बयान के अंत में स्वीकार किया है कि उसके मोबाइल में आवेश राजपूत उर्फ राणा जी एवं सहजाद उर्फ भट्ठी के साथ की गई बातचीत के व्हाट्सएप कॉल लॉग, चैट और अन्य सोशल मीडिया साइट्स के सबूत मौजूद हैं, जो इस पूरी राष्ट्रविरोधी और सांप्रदायिक साजिश को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं. पुलिस अब इस मामले में फरार आरोपियों और यूपी में होने वाली अगली घटना के बैकएंड लिंक की सघन जांच कर रही है.



