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हजारीबाग में रैयतों और विस्थापितों का फूटा आक्रोश, कोल ब्लॉक रद्द करने की मांग तेज

Hazaribagh: बड़कागांव बादम मेन रोड स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण के समीप रैयतों, विस्थापितों और प्रभावित ग्रामीणों की एक महाबैठक आयोजित की गई....

hazaribagh coal block

Hazaribagh: बड़कागांव बादम मेन रोड स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण के समीप रैयतों, विस्थापितों और प्रभावित ग्रामीणों की एक महाबैठक आयोजित की गई. बैठक में कोल परियोजना से प्रभावित लोगों की समस्याओं, कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध और आंदोलन की आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई. बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि क्षेत्र में चल रहा विरोध आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है. बैठक सुबह 9 बजे शुरू हुई, जिसमें रैयतों और विस्थापित परिवारों ने अपनी जमीन, आजीविका और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वक्ताओं ने कहा कि कोल परियोजना के कारण क्षेत्र के लोगों के सामने विस्थापन, आजीविका संकट और सामाजिक असुरक्षा जैसी समस्याएं खड़ी हो गई हैं, जबकि उनकी मांगों पर अब तक संतोषजनक पहल नहीं हुई है.

उपायुक्त से वार्ता की तैयारी

बैठक में आगामी दिनों में उपायुक्त के साथ प्रस्तावित वार्ता को लेकर रणनीति बनाई गई. ग्रामीणों ने तय किया कि प्रशासन के समक्ष रैयतों और विस्थापितों का पक्ष संगठित और मजबूती से रखा जाएगा, ताकि उनकी समस्याओं और मांगों का समाधान सुनिश्चित हो सके.

जेल भरो आंदोलन की बनी रूपरेखा

ग्रामीणों ने क्षेत्र में कथित पुलिस कार्यशैली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए बड़े पैमाने पर ‘जेल भरो आंदोलन’ चलाने की तैयारी पर चर्चा की. आंदोलनकारियों का कहना था कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.

बादम चौक पर पहरेदारी का निर्णय

आंदोलन को बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने और स्थानीय स्तर पर निगरानी मजबूत करने के लिए बादम चौक पर ग्रामीणों द्वारा नियमित पहरेदारी की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया. इसके लिए अलग-अलग गांवों के लोगों की जिम्मेदारी तय करने पर भी सहमति बनी.

कोल कंपनी वापस जाए या आवंटन रद्द हो”

बैठक में वक्ताओं ने एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि जब तक कोल कंपनी क्षेत्र से वापस नहीं जाती या सरकार द्वारा बादम-गोंदलपुरा कोल ब्लॉक का आवंटन रद्द नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि यह संघर्ष जमीन, जल-जंगल और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए है.

हर घर से एक सदस्य की भागीदारी

आंदोलन को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रत्येक घर से कम से कम एक सदस्य की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया. ग्रामीणों ने कहा कि रैयतों और विस्थापितों की समस्याओं के समाधान तक आंदोलन जारी रहेगा. बैठक के अंत में स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करने और प्रभावित परिवारों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की. साथ ही चेतावनी दी कि जनता की आवाज दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाए.

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