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रिम्स-2 के विरोध में ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना जारी, उपजाऊ कृषि भूमि बचाने की मांग

Shreya Gupta Ranchi : राजधानी के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 निर्माण के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा...

नगड़ी रिम्स-2

Shreya Gupta

Ranchi : राजधानी के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 निर्माण के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. 21 जून से स्थानीय ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हुए है. ग्रामीण कृषि योग्य उपजाऊ खेती की जमीन में रिम्स-2 का विरोध बैनर तले धरना दे रहे है. आंदोलनकारी किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी उपजाऊ कृषि भूमि पर किसी भी कीमत पर रिम्स-2 का निर्माण नहीं होने देंगे.

उपजाऊ खेती की जमीन बचाने की मांग

धरना दे रहे ग्रामीणों का कहना है कि नगड़ी की जिस भूमि पर रिम्स-2 बनाने की योजना है. वह पूरी तरह कृषि योग्य और अत्यंत उपजाऊ है. इस जमीन पर वर्षों से खेती होती रही है और यह स्थानीय किसानों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है. ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार किसानों की सहमति के बिना इस भूमि का उपयोग करना चाहती है.

अधिग्रहण प्रक्रिया पर उठाये सवाल

आंदोलनकारियों का दावा है कि संबंधित भूमि का विधिवत अधिग्रहण नहीं किया गया है. उनका कहना है कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है. ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाये. जिससे कथित जमीन घोटाले और दस्तावेजी अनियमितताओं का सच सामने आ सके.

मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

धरना दे रहे ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित किसानों ने न तो कोई मुआवजा स्वीकार किया है और न ही उन्हें उचित पुनर्वास की जानकारी दी गई है. उनका आरोप है कि सरकार जमीन से जुड़े वास्तविक तथयों को नजरअंदाज कर परियोजना को आगे बढ़ाना चाहती है. साथ ही सरकार पर आदिवासी समुदाय के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. गा्रमीणों का कहना है कि स्थानीय आदिवासियों के साथ अत्याचारपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है और उनकी बातों को सुनने के बजाय प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है.

वार्ता नहीं करने का आरोप

आरोप है कि सरकार अब तक किसानों और ग्रामीणों के साथ कोई सार्थक वार्ता करने के लिए आगे नहीं आई है. उनका आरोप है कि यदि सरकार सही है तो उसे ग्रामीणों के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए. आंदोलनकारियों का कहना है कि संवाद के अभाव में लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

पहले रिम्स को बेहतर बनाने की मांग

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि जब वर्तमान रिम्स-1 में अभी भी कई बुनियादी समस्याएं मौजूद हैं, तब नई परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च करने का क्या औचित्य है. उनका कहना है कि सरकार को पहले रिम्स-1 की व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए. उसके बाद किसी नई परियोजना पर विचार करना चाहिए.

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती और उपजाऊ कृषि भूमि पर रिम्स-2 निर्माण की योजना वापस नहीं लेती, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा. आंदोलनकारियों ने कहा कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका, आदिवासी अधिकारों और भविष्य की पीढ़ियों के अस्तित्व की भी है.

 

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