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चार्जशीट दाखिल होना अग्रिम जमानत में बाधा नहीं : HC से अधिवक्ता अभय मिश्रा को मिली अग्रिम जमानत

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल चार्जशीट दाखिल हो जाने या समन जारी होने के...

अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा को झारखंड हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली
अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा को झारखंड हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल चार्जशीट दाखिल हो जाने या समन जारी होने के आधार पर अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की याचिका खारिज नहीं की जा सकती. अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी की आशंका है तो उसकी अग्रिम जमानत याचिका विचारणीय बनी रहती है और मामले के तथ्यों के आधार पर उसका निर्णय किया जाना चाहिए.

न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने जगन्नाथपुर थाना स्थित विवेकानंद विद्या मंदिर स्कूल से जुड़े विवाद कांड संख्या 314/2017 मामले में आरोपी सह अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए यह टिप्पणी की. मामले में सूचक की ओर से दलील दी गई थी कि पुलिस जांच पूरी होने, चार्जशीट दाखिल होने, संज्ञान लिए जाने तथा समन जारी होने के बाद अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. इसके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया निर्णय का हवाला भी दिया गया. हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि जिस फैसले का हवाला दिया गया है, वह निजी शिकायत (प्राइवेट कंप्लेंट) से जुड़े मामले का था, जबकि वर्तमान मामला पुलिस जांच से उत्पन्न हुआ है. अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता ने जांच में सहयोग किया है और उसके सामने गिरफ्तारी की आशंका बनी हुई है. इसलिए अग्रिम जमानत याचिका को केवल तकनीकी आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता.

मामले के तथ्यों के आधार पर होगा निर्णय

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि चार्जशीट दाखिल होना अपने आप में अग्रिम जमानत देने में बाधा नहीं है. न्यायालय को प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करना चाहिए. व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दंड प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों की उदार व्याख्या आवश्यक है.

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तीन सप्ताह में समर्पण का निर्देश

सुनवाई के दौरान सूचक ने स्कूल फंड में कथित गड़बड़ी, भवन निर्माण, आयकर विभाग द्वारा लगाए गए जुर्माने तथा याचिकाकर्ता की पत्नी की नियुक्ति से संबंधित आरोप लगाए. वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि अधिकांश आरोप विवादित हैं और उनका परीक्षण ट्रायल के दौरान ही किया जा सकता है.

अदालत ने पाया कि भवन निर्माण से जुड़े आरोपों पर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दावे हैं तथा कई विवाद ऐसे हैं जिनका अंतिम निर्णय साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल में ही संभव है. साथ ही यह भी प्रथम दृष्टया सामने आया कि याचिकाकर्ता की पत्नी की नियुक्ति उस समय हुई थी जब याचिकाकर्ता स्कूल के सचिव नहीं थे. इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को तीन सप्ताह के भीतर निचली अदालत में समर्पण करने का निर्देश दिया और कहा कि समर्पण अथवा गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें 25 हजार रुपये के मुचलके तथा दो जमानतदारों पर अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाएगा. साथ ही ट्रायल में सहयोग करने की शर्त भी लगाई गई है.

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