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चतरा में नवचयनित होमगार्ड अभ्यर्थियों से मेडिकल जांच के नाम पर वसूली, डॉक्टर और जवान पर FIR दर्ज

Chatra : नवचयनित होमगार्ड अभ्यर्थियों से मेडिकल जांच और प्रमाण पत्र सत्यापन के दौरान अवैध वसूली करने के गंभीर मामले में प्रशासन...

FIR
चतरा में नवचयनित होमगार्ड अभ्यर्थियों से मेडिकल जांच के नाम पर वसूली

Chatra : नवचयनित होमगार्ड अभ्यर्थियों से मेडिकल जांच और प्रमाण पत्र सत्यापन के दौरान अवैध वसूली करने के गंभीर मामले में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. इस प्रकरण में मेडिकल टीम के डॉक्टर और एक होमगार्ड जवान खिलाफ सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.

DC के निर्देश पर हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई DC निर्देश पर की गई है. कान्हाचट्टी के सीओ सह चतरा सदर प्रखंड के प्रभारी प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) मनोज कुमार गोप ने सदर थाना पहुंचकर दोनों आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कराया. दर्ज प्राथमिकी में दोनों आरोपियों पर जबरन वसूली, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, लोक सेवक द्वारा गलत दस्तावेज तैयार करना, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.

क्या है पूरा मामला ?

चतरा जिला समादेष्टा होमगार्ड कार्यालय में 25 जुलाई से 12 अगस्त तक नवचयनित होमगार्ड जवानों के स्वास्थ्य परीक्षण और प्रमाण पत्रों का सत्यापन कार्य चल रहा है. इसी दौरान अभ्यर्थियों से मेडिकल फिट प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर 2,000 रुपये से लेकर 6,000 रुपये तक की अवैध राशि ऐंठने की लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं. प्रभारी बीडीओ मनोज कुमार गोप ने बताया कि अभ्यर्थियों की शिकायतों के आधार पर जब प्राथमिक जांच और पूछताछ की गई, तो मेडिकल टीम में शामिल चिकित्सक डॉ. अवशेष त्रिपाठी और होमगार्ड जवान आयुष कुमार सिंह की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध और संलिप्त पाई गई. इसके बाद वरीय अधिकारियों के निर्देशानुसार तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्णय लिया गया.

लाखों की वसूली की चर्चा, जांच रिपोर्ट पर भी सवाल

सूत्रों का दावा है कि मेडिकल जांच में फिट घोषित करने के नाम पर कुछ अभ्यर्थियों से 1 से 1.5 लाख रुपये तक की भारी-भरकम राशि भी वसूली गई है. स्थानीय लोगों और अभ्यर्थियों की मांग है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच की जाए, तो इस भ्रष्टाचार सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों का भी खुलासा हो सकता है. इसके साथ ही यह बात भी सामने आ रही है कि जांच रिपोर्ट जल्द तैयार करने और देने के एवज में अवैध वसूली में लिप्त कुछ अन्य कर्मियों पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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