Hazaribagh: बड़कागांव वन विभाग ने मोतरा अधिसूचित वन क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 60 टन अवैध कोयला जब्त किया है. वन विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय कोयला माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है कि जंगल क्षेत्र में अवैध उत्खनन कर भारी मात्रा में कोयला डंप किया गया था, जिसकी गुप्त सूचना क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक हजारीबाग को मिली थी. सूचना मिलते ही विभाग हरकत में आया और बड़कागांव वन क्षेत्र पदाधिकारी सह रेंजर रामबाबू कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर मोतरा जंगल में छापेमारी अभियान चलाया गया.

जंगल के अलग-अलग हिस्सों से मिला अवैध कोयला
वन विभाग की टीम ने छापेमारी के दौरान जंगल के विभिन्न हिस्सों में छिपाकर रखे गए अवैध कोयले को बरामद किया. विभागीय अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए पूरे कोयले को जब्त कर अपने कब्जे में ले लिया. जानकारी के अनुसार, जब्त किए गए कोयले को 10 ट्रैक्टर और एक हाईवा की मदद से बड़कागांव वन विश्रामागार लाया गया. कार्रवाई के दौरान वन विभाग के कई अधिकारी और कर्मी मौके पर मौजूद रहे.
अवैध खनन किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं: रेंजर
वन क्षेत्र पदाधिकारी रामबाबू कुमार ने कहा कि वन भूमि में अवैध खनन और कोयला डंपिंग किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट कहा कि मामले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और पहचान होने के बाद संबंधित आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम एवं अन्य संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में अवैध खनन और कोयला तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा.
लंबे समय से मिल रही थी अवैध कारोबार की शिकायत
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मोतरा और आसपास के जंगल क्षेत्रों में लंबे समय से अवैध कोयला कारोबार संचालित होने की शिकायत मिल रही थी. रात के अंधेरे में जंगलों से कोयला निकालकर अलग-अलग स्थानों पर डंप किया जाता था और बाद में उसकी तस्करी की जाती थी. वन विभाग की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अवैध कारोबार में शामिल लोगों में दहशत का माहौल है. ग्रामीणों ने विभागीय कार्रवाई का स्वागत करते हुए नियमित निगरानी और सख्त अभियान चलाने की मांग की है.
लगातार सख्ती के मूड में वन विभाग
वन विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि जंगल क्षेत्रों में अवैध खनन, लकड़ी कटाई और कोयला तस्करी के खिलाफ आगे भी व्यापक अभियान जारी रहेगा. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जंगल और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.
