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चाईबासा: “संघर्ष से समृद्धि तक, ‘दूध की धार’ ने बदली सुषमा देवी की तकदीर

Chaibaasa: ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में गव्य विकास विभाग की...

Chaibasa
गरीबी से आत्मनिर्भरता तक का सफर

Chaibaasa: ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में गव्य विकास विभाग की योजनाएं पश्चिमी सिंहभूम जिले में प्रभावी परिणाम दे रही हैं. इन योजनाओं का एक प्रेरणादायक उदाहरण आनंदपुर प्रखंड के आनंदपुर गांव की निवासी सुषमा देवी हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और विभागीय सहयोग के बल पर दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है. आज वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही हैं. पश्चिमी सिंहभूम जिले के आनंदपुर प्रखंड के आनंदपुर गांव की सुषमा देवी ने गव्य विकास विभाग की योजनाओं और प्रशिक्षण के माध्यम से दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. सीमित संसाधनों से शुरू हुई उनकी यह यात्रा आज आत्मनिर्भरता और प्रेरणा की कहानी बन चुकी है.

आर्थिक तंगी से जूझता परिवार

कुछ वर्ष पहले तक सुषमा देवी का परिवार सीमित आय पर निर्भर था.घर की जरूरतें, बच्चों की शिक्षा और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना उनके लिए कठिन था. ऐसे समय में उन्होंने परिस्थितियों से हार मानने के बजाय खुद कुछ करने का निर्णय लिया.

प्रशिक्षण ने खोला आत्मनिर्भरता का रास्ता

उन्हें गव्य विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी मिली. उन्होंने तीन दिवसीय गोपालन प्रशिक्षण में भाग लिया, जहां उन्हें वैज्ञानिक पशुपालन, पशु पोषण, रोग नियंत्रण, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की तकनीक और व्यवसाय प्रबंधन की जानकारी मिली.

सरकारी अनुदान से हुई शुरुआत

प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2021-22 में उन्होंने गव्य विकास विभाग की 50 प्रतिशत अनुदान योजना का लाभ लेकर गाय पालन शुरू किया.शुरुआती दौर में संसाधनों की कमी और अनुभव की चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने धैर्य और मेहनत से काम जारी रखा. विभागीय अधिकारियों के नियमित मार्गदर्शन, संतुलित पशु आहार, समय पर टीकाकरण और स्वच्छ पशुशाला प्रबंधन अपनाने से धीरे-धीरे दूध उत्पादन बढ़ने लगा। कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने काम को निरंतर आगे बढ़ाया.

आज आत्मनिर्भर बनीं सुषमा देवी

आज सुषमा देवी के पास 8 दुधारू गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 50 से 60 लीटर दूध का उत्पादन होता है. वे दूध के साथ-साथ घी, पनीर और दही जैसे उत्पाद बनाकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं. इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल गई है.

सुषमा देवी का अनुभव और संदेश

सुषमा देवी बताती हैं कि पहले परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल था, लेकिन सरकारी योजना और प्रशिक्षण के बाद उन्होंने पूरे मन से काम शुरू किया. शुरुआत कठिन थी, लेकिन आज यह व्यवसाय उन्हें आर्थिक मजबूती के साथ आत्मसम्मान भी दे रहा है. वे अन्य ग्रामीण महिलाओं से भी आगे आकर आत्मनिर्भर बनने की अपील करती हैं.

अधिकारियों का दृष्टिकोण

जिला गव्य विकास पदाधिकारी श्री राम नारायण शाश्वत ने बताया कि विभाग का उद्देश्य केवल अनुदान देना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक पशुपालन के जरिए स्थायी आजीविका देना है. प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन से लाभुकों को लगातार सहयोग दिया जा रहा है.

प्रशासन की भूमिका और प्रेरणा

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रहा है. उन्होंने कहा कि सही दिशा में प्रयास और सरकारी योजनाओं के उपयोग से सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.

आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी

सुषमा देवी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाएं, प्रशिक्षण और मेहनत मिलकर किसी भी व्यक्ति के जीवन को बदल सकते हैं. जिला प्रशासन और विभाग ने अन्य ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे योजनाओं का लाभ उठाकर वैज्ञानिक पशुपालन अपनाएं और आत्मनिर्भर बनें.

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