Bokaro: दो दिवसीय चिन्मय अमृत यात्रा का समापन 5 जुलाई को संपन्न हुआ. रविवार को यात्रा वाहिनी को चिन्मय विद्यालय बोकारो से चिन्मय मिशन चास और आगे जमशेदपुर के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. इस दौरान स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती, विद्यालय के अध्यक्ष बिस्वरूप मुखोपाध्याय, सचिव महेश त्रिपाठी, प्राचार्य सूरज शर्मा, वरीय उप प्राचार्य नरमेंद्र कुमार और उप प्राचार्य डॉ. रोशन शर्मा उपस्थित रहे. परम पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती का जयकारा लगाकर अमृत यात्रा वाहिनी को विदाई दी गई. चिन्मय अमृत यात्रा वाहिनी को रवाना करने से पहले विद्यालय परिवार के प्रबंधन सदस्य एवं शिक्षकों ने गुरुदेव के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद लिया. सभी गुरुदेव की पादुका के सामने नतमस्तक हुए. उनको याद करते हुए सभी की आंखें नम हो गई.
‘अमृत यात्रा केवल एक यात्रा नहीं, गुरुदेव के उपदेशों की बहती गंगा है’
सचिव महेश त्रिपाठी ने कहा कि गुरुदेव को याद करना और उनके आदर्श जीवन के बारे में इतने करीब से जानना खुद में एक अविस्मरणीय अनुभव रहा. उन्होंने कहा कि अमृत यात्रा केवल एक यात्रा नहीं है, बल्कि ये गुरुदेव के उपदेशों की बहती हुई गंगा है, जो पूरे भारत में लगातार बह रही है. उन्होंने गुरुदेव को याद करते हुए कहा कि उनके उपदेशों को आत्मसात करने की जरूरत सभी को है. खासतौर से विद्यार्थियों को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपनी संस्कृति और अपने इतिहास का सम्मान करना चाहिए.

प्रिंसिपल सूरज शर्मा ने कहा कि हम सभी के लिए बहुत ही यादगार और भावुक पल है. चिन्मय अमृत यात्रा पूरे बोकारो परिवार में ऊर्जा का संचार कर गया है. चिन्मय अमृत यात्रा चिन्मय विद्यालय बोकारो से चिन्मय मिशन चास के लिए रवाना की गई. यहां गुरुदेव की पादुका के दर्शन के बाद यात्रा जमशेदपुर के लिए रवाना की गई. अमृत यात्रा के साथ चिन्मय युवा केंद्र के ब्रह्मचारी सुधीर चैतन्य और तारिणी चैतन्य मौजूद रहे. इस दौरान विद्यालय एनसी मिश्रा, पुनित दोशी, सुप्रिया चौधरी, संजय चक्रवर्ती, एसएन झा, संजीव कुमार, रणवीजय ओझा, रजनीश चौधरी, आदर्श आचार्या, रविशंकर, अंकित श्वेताभ, नितेश पांडे एवं सागर कुमहार, युवा वीरों में श्रीविद्या, अनन्या अग्रवाल, आर्या, सुमुख, मोहित शर्मा और रतेश भी मौजूद रहे.
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