Giridih: धनवार अंचल के खैरीडीह में अवैध पत्थर उत्खनन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. आरोप है कि भाजपा ग्रामीण जिला उपाध्यक्ष उदय सिंह के संरक्षण में पिछले करीब दो वर्षों से बिना आवश्यक सरकारी स्वीकृतियों के पत्थर खदान का संचालन किया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीतिक रसूख के दम पर नियम-कानूनों को खुलेआम ताक पर रखा जा रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है.
प्रतिदिन लगभग 30 हाईवा पत्थर खदान से निकाले जा रहे हैं
जानकारी के अनुसार संबंधित पत्थर खदान के पास न तो DGMS से ब्लास्टिंग की अनुमति है, न ही SEIAA से पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) प्राप्त है. इतना ही नहीं, खनन विभाग की ओर से नियमित चालान निर्गत किए जाने की भी जानकारी सामने नहीं आ रही है. इसके बावजूद खदान में बड़े पैमाने पर उत्खनन जारी रहने का आरोप लगाया जा रहा है. स्थानीय सूत्रों का दावा है कि प्रतिदिन लगभग 30 हाईवा पत्थर खदान से निकाले जा रहे हैं. यदि यह आरोप सही है तो सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना आवश्यक अनुमति और कागजी प्रक्रिया पूरी किए इतने बड़े स्तर पर खनन कार्य कैसे संचालित हो रहा है?
पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा हो गया है
गौरतलब है कि यही वह खदान है जहां पूर्व में आपसी विवाद के दौरान चाकूबाजी की घटना में एक व्यक्ति की हत्या हो गई थी. उस घटना के बाद कुछ लोगों को जेल भी जाना पड़ा था और कुछ समय के लिए खदान का संचालन बंद हो गया था. लेकिन आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर खदान को दोबारा शुरू करा दिया गया. स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि दिन के समय खदान परिसर के पास बने कार्यालय में ताला लटका रहता है, जबकि अंदर ही अंदर खनन और पत्थर ढुलाई का काम जारी रहता है. इससे पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा हो गया है.
चर्चा का विषय बनी हुई है
विपक्ष के नेता और धनवार विधायक बाबूलाल मरांडी अक्सर विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं, लेकिन उनके विधानसभा क्षेत्र में कथित अवैध पत्थर उत्खनन के मामले पर चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है. इधर गिरिडीह उपायुक्त द्वारा अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया जा चुका है, बावजूद इसके धनवार क्षेत्र में कथित अवैध पत्थर उत्खनन जारी रहने के आरोप प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं. अब देखना यह होगा कि सरकार और जिला प्रशासन इस मामले में जांच कर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा.
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