Chakradharpur: झारखंड में पिछले कई वर्षों से बालू घाटों की नियमित ई-टेंडर प्रक्रिया बंद होने के कारण राज्य में निर्माण कार्य और विकास की गति पूरी तरह थम गई है. उक्त बातें जीप सदस्य बसंती पूर्ति ने एक प्रेस बयान जारी कर कहीं. उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए बालू की किल्लत और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने आरोप लगाया कि पारदर्शी बालू नीति के अभाव में राज्य में अवैध खनन और बालू की कालाबाजारी चरम पर है. टेंडर प्रक्रिया बंद होने से सरकारी राजस्व की भारी क्षति हो रही है और इसका लाभ माफिया तत्वों को मिल रहा है. बालू की उपलब्धता न होने के कारण निर्माण क्षेत्र से जुड़े हजारों गरीब मजदूर, मिस्त्री और ट्रक चालक आज बेरोजगार हो गए हैं.उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.
बालू से प्राप्त राजस्व और अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग
जीप सदस्य बसंती पूर्ति ने तीखा सवाल करते हुए कहा, कि एक तरफ झारखंड सरकार अबुआ आवास और प्रधानमंत्री आवास योजना को जल्द पूरा करने का दबाव दे रही है, वहीं दूसरी तरफ बालू उपलब्ध नहीं है. बिना बालू के गरीब अपना घर कैसे बनाएंगे? उन्होंने सवाल उठाया कि जब आधिकारिक टेंडर नहीं हुए, तो सरकारी पुलों और भवनों के निर्माण के लिए बालू कहां से आ रहा है? उन्होंने पिछले 8 वर्षों के दौरान बालू से प्राप्त राजस्व और इसमें हुई अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने झारखंड सरकार से आग्रह किया है, कि जनहित को देखते हुए अविलंब ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि आम जनता को उचित दर पर बालू मिल सके और रुके हुए विकास कार्य पुनः शुरू हो सकें. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती है, तो क्षेत्र के प्रभावित लोग और मजदूर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.



