Hazaribagh : टाटीझरिया प्रखंड क्षेत्र में जंगली हाथियों का खौफ लगातार गहराता जा रहा है. अभी तक एक अकेले हाथी की गतिविधियों से दहशत में जी रहे ग्रामीणों के सामने अब नई और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. 24 हाथियों का एक बड़ा झुंड 17 माइल जंगल में पहुंचकर डेरा डाल चुका है. इससे इलाके में गजराज की दहशत और बढ़ गई है. रविवार को सामने आई जानकारी के मुताबिक हाथियों के इस बड़े झुंड की मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है.
पहले अकेला हाथी बना था सिरदर्द, अब झुंड की दस्तक
टाटीझरिया और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ समय से एक हाथी की गतिविधियों ने ग्रामीणों को परेशान कर रखा था. अकेले हाथी के आने-जाने और संभावित उत्पात को लेकर लोग शाम ढलते ही सतर्क हो जाते थे. अब इसी क्षेत्र में 24 हाथियों के झुंड के पहुंचने से स्थिति और संवेदनशील हो गई है. 17 माइल जंगल में हाथियों के डेरा डालने की खबर फैलते ही आसपास के गांवों में भी सतर्कता बढ़ गई है. ग्रामीणों को आशंका है कि जंगल में भोजन और पानी की तलाश में विचरण करने वाला झुंड कभी भी जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों और खेतों की ओर रुख कर सकता है.
एक तरफ फसल, दूसरी तरफ जान-माल की चिंता
ग्रामीणों के लिए हाथियों की मौजूदगी केवल फसल नुकसान तक सीमित चिंता नहीं है. खेतों में लगी फसलें हाथियों के झुंड को आकर्षित कर सकती हैं. वहीं, रात के समय हाथियों के गांवों की ओर बढ़ने की स्थिति में जान-माल के नुकसान का खतरा भी बना रहता है. ऐसे में किसान अपनी फसलों की रखवाली को लेकर परेशान हैं. लेकिन हाथियों के झुंड के सामने खेतों तक जाना भी जोखिम से खाली नहीं है. यही वजह है कि ग्रामीणों के बीच ‘फसल बचाएं या जान?’ जैसी स्थिति पैदा हो गई है.फिलहाल 24 हाथियों के झुंड के 17 माइल जंगल में डेरा डालने की सूचना है. जंगल में इनकी मौजूदगी पर ग्रामीण लगातार नजर बनाए हुए हैं. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी से भी इलाके में हाथियों की सक्रियता की पुष्टि होती है. ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के झुंड की दिशा पर लगातार नजर रखना जरूरी है, क्योंकि जंगल से निकलने के बाद हाथियों का रास्ता तय नहीं होता. वे खेतों, कच्चे रास्तों या आबादी वाले इलाकों की ओर भी बढ़ सकते हैं.
वन विभाग की चुनौती भी बढ़ी
एक अकेले हाथी की निगरानी और उसे आबादी से दूर रखने की चुनौती के बीच अब 24 हाथियों के झुंड की मौजूदगी ने वन विभाग के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. इतने बड़े झुंड को नियंत्रित तरीके से जंगल की ओर बनाए रखना आसान नहीं होता. जरूरत इस बात की है कि वन विभाग की टीम संवेदनशील गांवों में लगातार निगरानी रखे, ग्रामीणों को हाथियों की गतिविधियों की जानकारी दे और लोगों को रात में जंगल या खेतों की ओर नहीं जाने के लिए सचेत करे. हाथियों की मौजूदगी के दौरान ग्रामीणों से विशेष सावधानी बरतने की अपील जरूरी है. हाथियों को देखने के लिए भीड़ लगाना, उनके बेहद करीब जाना, उन्हें घेरना या फोटो-वीडियो बनाने के लिए पीछा करना बेहद खतरनाक हो सकता है. खासकर रात के समय जंगल और हाथियों के संभावित रास्तों से दूरी बनाए रखना ही सुरक्षित है.
डबल स्ट्राइक से सहमा टाटीझरिया
टाटीझरिया में हालात इस समय इसलिए भी गंभीर हैं क्योंकि एक तरफ अकेले हाथी का पुराना खौफ बना हुआ है और दूसरी तरफ 24 हाथियों के झुंड की नई दस्तक ने खतरा बढ़ा दिया है. स्थानीय लोग इसे गजराज की ‘डबल स्ट्राइक’ के रूप में देख रहे हैं. अब सबकी नजर इस बात पर है कि 24 हाथियों का यह झुंड 17 माइल जंगल में कितने समय तक रहता है और अगला रुख किस ओर करता है. ग्रामीणों की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि हाथियों का झुंड आबादी और खेतों से दूर रहे और वन विभाग समय रहते प्रभावी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे.
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