Hazaribagh : राष्ट्रीय राजमार्ग-2 स्थित दनुआ घाटी में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. शनिवार को एक बार फिर घाटी में कई वाहन आपस में टकरा गए. बीते 12 घंटों के भीतर कुल 13 वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना ने इस मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था और सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारण दनुआ घाटी में लंबा जाम लग गया. यात्री घंटों सड़क पर फंसे रहे और आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि चौपारण थाना प्रभारी पंकज कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम को घंटों तक पसीना बहाकर यातायात सामान्य कराने में जुटना पड़ा.
स्थानीय लोगों का कहना
गनीमत रही कि इन हादसों में केवल तीन लोगों को मामूली चोटें आईं, जबकि कई वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा. यदि वाहनों की गति अधिक होती या मौसम प्रतिकूल रहता तो बड़ा हादसा भी हो सकता था. लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद दनुआ घाटी में स्थायी सुरक्षा उपायों की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्घटनाओं के बाद केवल राहत और बचाव कार्य किए जाते हैं, लेकिन दुर्घटनाओं के कारणों को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नजर नहीं आता.

लोगों का आरोप
वहीं, सड़क पर लगाए गए रेड टेप (सुरक्षा मार्किंग) की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं. लोगों का आरोप है कि सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं प्रभावी साबित नहीं हो रही हैं, जिसके कारण आए दिन वाहन अनियंत्रित होकर एक-दूसरे से टकरा रहे हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दनुआ घाटी को विभाग कब प्राथमिकता देगा? जब लगभग हर दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, तब भी जिम्मेदार विभागों की उदासीनता लोगों की चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ा रही है. स्थानीय नागरिकों ने घाटी में वैज्ञानिक ढंग से सुरक्षा उपाय लागू करने, सड़क की तकनीकी जांच कराने और दुर्घटना रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है.
Also Read : रेल लाइन से छूट रहे इलाकों के लिए सांसद ने उठाई आवाज, बड़गढ़-भंडरिया को जोड़ने की मांग
