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हजारीबाग: DVC के 79वें स्थापना दिवस पर विस्थापितों ने मनाया ‘बलिदान दिवस’, पूर्वजों के त्याग को किया नमन

Hazaribagh: दामोदर घाटी निगम के 79वें स्थापना दिवस के अवसर पर मंगलवार को विष्णुगढ़ प्रखंड के नावाटांड़ स्थित सामुदायिक भवन में DVC...

DVC 79th Foundation Day
सामुदायिक भवन में मनाया गया बलिदान दिवस

Hazaribagh: दामोदर घाटी निगम के 79वें स्थापना दिवस के अवसर पर मंगलवार को विष्णुगढ़ प्रखंड के नावाटांड़ स्थित सामुदायिक भवन में DVC विस्थापित केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर ‘बलिदान दिवस’ श्रद्धा, सम्मान और संकल्प के साथ मनाया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों ने अपने पूर्वजों के त्याग और संघर्ष को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा विकास के साथ न्यायपूर्ण पुनर्वास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग दोहराई. कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेश राम ने की, जबकि संचालन बालेश्वर प्रसाद सिंह ने किया. समारोह की शुरुआत पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को स्मरण करते हुए की गई.

“7 जुलाई केवल स्थापना दिवस नहीं, हजारों परिवारों के बलिदान का भी दिन”

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा, कि 7 जुलाई केवल DVC का स्थापना दिवस नहीं है, बल्कि उन हजारों विस्थापित परिवारों के अद्वितीय त्याग और संघर्ष को याद करने का दिन भी है, जिनकी जमीन, घर, खेत, जंगल और सांस्कृतिक विरासत के बलिदान पर DVC जैसी महत्वपूर्ण संस्था की नींव रखी गई. उन्होंने कहा कि देश के विकास और ऊर्जा उत्पादन में इन परिवारों का योगदान अविस्मरणीय है, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार अपने मूल अधिकारों और आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं.

पुनर्वास, जमीन का स्वामित्व, पानी और बिजली की समस्याएं अब भी बरकरार

वक्ताओं ने कहा कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब उससे प्रभावित लोगों को सम्मानजनक पुनर्वास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं भी मिलें. उन्होंने बताया कि आज भी अनेक विस्थापित परिवार पुनर्वास भूमि के वैधानिक स्वामित्व, स्वच्छ पेयजल, निर्बाध बिजली आपूर्ति तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की समस्या से जूझ रहे हैं. उन्होंने DVC प्रबंधन और संबंधित सरकारों से इन समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक और संवेदनशील पहल करने की मांग की.

‘बलिदान दिवस’ विरोध नहीं, पूर्वजों के प्रति सम्मान का प्रतीक

कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि ‘बलिदान दिवस’ किसी संस्था या व्यक्ति के विरोध का मंच नहीं है, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके सपनों को सम्मान दिलाने का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में विस्थापित परिवारों के योगदान को हमेशा सम्मान मिलना चाहिए तथा उन्हें विकास की मुख्यधारा में समान भागीदारी और अधिकार सुनिश्चित किए जाने चाहिए.

लोकतांत्रिक तरीके से अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का लिया संकल्प

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने अपने पूर्वजों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संकल्प लिया, कि उनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जाएगा. साथ ही यह भी कहा गया कि विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से आगे भी जारी रखी जाएगी.

बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाओं की रही भागीदारी

कार्यक्रम में पुरुष महतो, नूनूचंद्र प्रसाद, सचिन कुमार दास, दालों महतो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे. वहीं करमी देवी, मीना देवी, कौशल्या देवी, धनेश्वरी देवी, तिलेश्वरी देवी, राधा कुमारी, भारती कुमारी, कांति देवी, उर्मिला देवी, पूनम कुमारी, गौरी देवी, कलावती देवी, रतनी देवी सहित सैकड़ों महिला-पुरुषों ने भाग लेकर अपने पूर्वजों के बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया.

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