हजारीबाग: बदहाली की मार झेल रहा ऐतिहासिक बड़की बंधिया, पहचान पर संकट

Hazaribagh:विष्णुगढ़ प्रखंड के रमुआ स्थित ऐतिहासिक बड़की बंधिया आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. कभी किसानों की फसलों को जीवन...

Hazaribagh:विष्णुगढ़ प्रखंड के रमुआ स्थित ऐतिहासिक बड़की बंधिया आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. कभी किसानों की फसलों को जीवन देने वाला और क्षेत्र की धार्मिक आस्था का केंद्र रहा यह जलाशय अब गंदगी, जलकुंभी और प्रशासनिक उपेक्षा के बोझ तले कराह रहा है. इसकी वर्तमान स्थिति देखकर ग्रामीणों के मन में एक ही सवाल उठ रहा है आखिर इस ऐतिहासिक धरोहर का कसूर क्या है?

गंदगी और जलकुंभी से घिरा जलाशय

बेड़ा हरियारा पंचायत अंतर्गत स्थित बड़की बंधिया वर्षों तक क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ माना जाता था. लेकिन आज इसकी तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. जहां कभी स्वच्छ जल और हरियाली का दृश्य दिखाई देता था, वहां अब जलकुंभी की मोटी परत, गंदगी और दुर्गंध का साम्राज्य फैला हुआ है. स्थानीय लोगों के अनुसार, आसपास के नालों का गंदा पानी लगातार बंधिया में गिर रहा है, जिससे जल प्रदूषण की समस्या गंभीर हो गई है. स्थिति यह है कि मवेशी भी मजबूरी में इसी दूषित पानी का उपयोग कर रहे हैं. इसके बावजूद अब तक न तो सफाई अभियान चलाया गया और न ही किसी स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल हुई है.

इतिहास और आस्था से जुड़ी है बड़की बंधिया

बड़की बंधिया केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि विष्णुगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है. स्थानीय इतिहास के अनुसार इसके समीप कभी राजा लक्ष्मण कुंवर का किला हुआ करता था, जिसके अवशेष आज भी क्षेत्र के गौरवशाली अतीत की कहानी बयां करते हैं. धार्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है. दुर्गा पूजा सहित कई धार्मिक आयोजनों में इसी जलाशय के जल का उपयोग किया जाता है और प्रतिमाओं का विसर्जन भी यहीं होता है. बावजूद इसके, यह ऐतिहासिक धरोहर प्रशासनिक उदासीनता का शिकार बनी हुई है.

योजनाएं बनीं, लेकिन काम नहीं हुआ शुरू

ग्रामीणों की लगातार मांग पर बड़की बंधिया के गहरीकरण और पुनरुद्धार की योजना बनाई गई थी. मामला विधानसभा तक पहुंचा और जनप्रतिनिधियों की ओर से अनुशंसा भी की गई. लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी योजना कागजों से बाहर नहीं निकल सकी. ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी केवल प्राक्कलन और फाइलों की चर्चा करते रहे, जबकि बंधिया की हालत दिन-ब-दिन खराब होती चली गई. समय पर कार्रवाई नहीं होने से जलाशय का अस्तित्व ही संकट में पड़ता जा रहा है.

सूखती खेती, टूटती किसानों की उम्मीदें

एक दौर था जब बड़की बंधिया का पानी सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई करता था. खेत लहलहाते थे और किसान समृद्धि की राह पर आगे बढ़ते थे. लेकिन आज जलाशय की दुर्दशा का सीधा असर खेती पर पड़ रहा है. पानी की कमी के कारण कई खेत बंजर होने लगे हैं और किसानों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं. ग्रामीणों का मानना है कि यदि बंधिया की सफाई, गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जाए तो यह जलाशय फिर से क्षेत्र की कृषि, पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बन सकता है.

धरोहर को बचाने की उठी मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से ऐतिहासिक बड़की बंधिया के संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते इसे बचाने की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ियां केवल कहानियों में सुनेंगी कि यहां कभी एक विशाल और जीवनदायी बड़की बंधिया हुआ करता था.

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