Hazaribagh:उच्च शिक्षा और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने की पहल के तहत आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं. यह समझौता शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है, जिससे दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है.
दोनों संस्थानों के शीर्ष अधिकारियों ने किए हस्ताक्षर
8 जून 2026 को संपन्न हुए इस समझौते पर भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. एस.एन. सुशील तथा आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. मुनीष गोविंद ने हस्ताक्षर किए. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समकुलपति डॉ. एस.आर. रथ, कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. अरविंद कुमार, सहायक प्राध्यापक डॉ. सुजीत कुमार पटेल सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक मौजूद रहे.भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की ओर से पादप शरीर क्रिया विज्ञान एवं जैव रसायन विभाग के प्रमुख डॉ. एम.के. श्रीवास्तव, संस्थान प्रौद्योगिकी प्रबंधन इकाई की प्रभारी डॉ. स्वप्ना एम सहित अन्य वैज्ञानिकों ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई.

संयुक्त अनुसंधान और तकनीकी सहयोग पर रहेगा जोर
एमओयू के तहत दोनों संस्थान कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं संचालित करेंगे. इसके अलावा छात्र एवं शिक्षक आदान-प्रदान कार्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यशालाएं, तकनीकी विशेषज्ञता का साझा उपयोग तथा नवाचार आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इस सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अत्याधुनिक तकनीकों, अनुसंधान पद्धतियों और कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीन प्रयोगों से जुड़ने का अवसर मिलेगा.
विद्यार्थियों ने किया भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान का शैक्षणिक भ्रमण
समझौते के अवसर पर आईसेक्ट विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान का शैक्षणिक भ्रमण भी किया. इस दौरान छात्रों को गन्ना अनुसंधान की आधुनिक तकनीकों, उन्नत प्रयोगशालाओं, कृषि नवाचारों और विभिन्न वैज्ञानिक परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई. भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने अनुसंधान कार्यों को करीब से देखा और कृषि क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं को समझा। इससे उन्हें कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर मिला.
कुलपति बोले- शोध और नवाचार को मिलेगी नई गति
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गौरव शुक्ला ने कहा कि यह समझौता विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा. उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने में यह साझेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. वहीं कुलसचिव डॉ. मुनीष गोविंद ने कहा कि दोनों संस्थानों के बीच स्थापित यह सहयोग ज्ञान, तकनीक और संसाधनों के आदान-प्रदान को सशक्त बनाएगा. इससे विद्यार्थियों को व्यवहारिक अनुभव प्राप्त होगा और उनका शैक्षणिक विकास भी होगा.
कौशल विकास और कृषि नवाचार को मिलेगी नई दिशा
समकुलपति डॉ. एस.आर. रथ ने कहा कि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में ऐसे सहयोगात्मक प्रयास विद्यार्थियों के कौशल विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं. साथ ही कृषि क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीकों के प्रसार को भी गति मिलती है. कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि यह एमओयू विद्यार्थियों को केवल कक्षाओं तक सीमित ज्ञान नहीं देगा, बल्कि उन्हें अनुसंधान, तकनीक और कृषि क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर भी प्रदान करेगा.
उच्च शिक्षा और कृषि अनुसंधान के बीच मजबूत होगी साझेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि आईसेक्ट विश्वविद्यालय और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के बीच हुई यह साझेदारी उच्च शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे न केवल विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को लाभ मिलेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी विकास और अनुसंधान आधारित समाधान को भी नई गति प्राप्त होगी.
AlsoRead:रांची: कांके डैम को प्रदूषण से बचाने के लिए नगर निगम की कार्रवाई, हटाया गया 11 अवैध सुअर पालन केंद्र
