नगर निगम या ‘सियासी अखाड़ा’? हजारीबाग में महापौर और नगर आयुक्त के बीच ‘आर-पार’ की जंग

Hazaribagh: शहर की सफाई हो या न हो, लेकिन नगर निगम के गलियारों में सियासी टकराव और विवाद जरूर बढ़ गए हैं....

Hazaribagh: शहर की सफाई हो या न हो, लेकिन नगर निगम के गलियारों में सियासी टकराव और विवाद जरूर बढ़ गए हैं. हजारीबाग नगर निगम अब विकास कार्यों से ज्यादा महापौर बनाम नगर आयुक्त की खींचतान को लेकर चर्चा में है. महापौर अरविंद कुमार राणा ने नगर आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं.

CM को लिखी शिकायत, आरोपों की झड़ी

मेयर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नगर आयुक्त के खिलाफ शिकायत की है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अब तक आधिकारिक वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया. वहीं नगर आयुक्त का कहना है कि मेयर को पहले वाहन दिया गया था, जिसे उन्होंने वापस कर दिया और नए वाहन की मांग की. मेयर का यह भी आरोप है कि उनके निजी वाहन को मुख्य द्वार के सामने खड़ा करने पर रोक लगा दी गई है. साथ ही उनके कार्यालय के लिए कर्मचारी भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि एक पत्र टाइप कराने के लिए दिया गया था, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी वह टाइप नहीं किया गया.

संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप

महापौर अरविंद कुमार राणा ने कहा कि उन्हें ‘रबड़ स्टैंप’ बनाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि अनुच्छेद 243 की भावना के विपरीत काम हो रहा है और झारखंड म्युनिसिपल एक्ट 2011 को नजरअंदाज किया जा रहा है. उन्होंने 25 अप्रैल की बोर्ड बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि बैठक के दौरान नगर आयुक्त का बीच में ही जिम्मेदारी सौंपकर निकल जाना बोर्ड की गरिमा के खिलाफ है.

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मीडिया से बात करने पर भी रोक का आरोप

महापौर ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मीडिया से बात करने के लिए भी नगर आयुक्त से अनुमति लेने को कहा जा रहा है. उन्होंने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि क्या अब लोकतंत्र में बोलने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ेगी.

नगर निगम में अव्यवस्था और संसाधनों पर सवाल

महापौर ने शहर की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि नगर निगम कबाड़खाना बनता जा रहा है. करोड़ों की लागत से खरीदे गए वाहन बिना उपयोग के खराब हो रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें फाइलों की समीक्षा करने और बैठकों में सक्रिय भूमिका निभाने से रोका जा रहा है. साथ ही म्युनिसिपल एक्ट की धारा 33 के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया.

उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज

महापौर ने पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और साफ किया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे. अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या हजारीबाग की जनता को इस टकराव का खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

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