Hazaribagh : जिले के चौपारण प्रखंड अंतर्गत सिंघरावां गांव स्थित हनुमान मंदिर की जमीन को लेकर नया विवाद सामने आया है. ग्रामीणों ने अंचल अधिकारी चौपारण को आवेदन सौंपकर मंदिर की भूमि पर कथित अतिक्रमण और निजी स्वामित्व के दावों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सार्वजनिक धार्मिक उपयोग में रही भूमि पर कुछ लोग निजी मालिकाना हक जता रहे हैं, जिससे गांव में असमंजस और तनाव की स्थिति बन गई है.
मंदिर निर्माण के लिए दान की गई थी जमीन
ग्रामीणों के अनुसार मौजा सिंघरावां, थाना चौपारण के खाता संख्या-56 तथा प्लॉट संख्या-1685 और 1686 की करीब 15 डिसमिल भूमि मूल रूप से स्वर्गीय गोपाल साव के नाम दर्ज थी. उनका कोई वारिस नहीं होने के कारण यह भूमि वर्षों पहले हनुमान मंदिर के निर्माण और धार्मिक कार्यों के लिए दान कर दी गई थी. ग्रामीणों का दावा है कि इसी जमीन पर गांववासियों ने चंदा और जनसहयोग से हनुमान मंदिर का निर्माण कराया था. बाद में मंदिर जर्जर होने पर पुनः ग्रामीणों के सहयोग से नए मंदिर का निर्माण किया गया, जहां वर्तमान में नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं.
तीन लोगों पर निजी स्वामित्व का दावा करने का आरोप
ग्रामीणों ने आवेदन में उल्लेख किया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) के सिक्स लेन चौड़ीकरण के दौरान मंदिर की कुछ भूमि अधिग्रहित की गई थी. इसके बदले मिलने वाला मुआवजा भी हनुमान मंदिर के नाम पर दिया गया था. ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकारी अभिलेखों में मंदिर को मुआवजा प्राप्त हुआ, तो शेष भूमि पर निजी स्वामित्व का दावा कई सवाल खड़े करता है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि दामोदर साव, कमलेश साव और विनोद साव (पिता स्वर्गीय रघु साव) मंदिर की शेष भूमि पर स्वामित्व का दावा कर रहे हैं. संबंधित पक्ष का कहना है कि यह जमीन उनके पूर्वज मितन तेली को प्राप्त हुई थी और इसका उल्लेख अंचल कार्यालय के रजिस्टर-2 में दर्ज है. हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि जब दावेदारों से उनके दावे के समर्थन में मूल दस्तावेज, केवाला (बिक्री विलेख) या अन्य प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया, तो वे कोई ठोस मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके.
मूल अभिलेखों की जांच की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भूमि से संबंधित मूल अभिलेखों, रजिस्टर-2, खतियान, दान पत्र और अन्य राजस्व रिकॉर्ड की गहन जांच कराई जाए. उनका कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित भूमि वास्तव में मंदिर की है या किसी निजी व्यक्ति की. ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि समय रहते मामले का समाधान नहीं किया गया, तो सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है और विकास कार्यों में भी बाधा आ सकती है. ग्रामीणों के अनुसार भूमि विवाद के कारण मंदिर से जुड़े निर्माण और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं. वहीं NH-2 सिक्स लेन परियोजना से संबंधित कुछ प्रक्रियाओं में भी अनिश्चितता बनी हुई है. ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.
धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा पर फिर छिड़ी बहस
सिंघरावां का यह मामला सामने आने के बाद जिले में मठ-मंदिरों और अन्य धार्मिक संस्थाओं की जमीनों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि हाल के वर्षों में धार्मिक संपत्तियों पर स्वामित्व विवाद के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें पुराने दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों के आधार पर दावे किए जाते रहे हैं. हालांकि किसी भी भूमि विवाद में स्वामित्व का अंतिम निर्धारण संबंधित राजस्व प्राधिकार और न्यायिक प्रक्रिया के तहत जांच के बाद ही संभव है. ग्रामीणों ने अंचल अधिकारी से मांग की है कि संबंधित भूमि के सभी मूल अभिलेखों की जांच कराई जाए, दावेदार पक्षों से प्रमाणित दस्तावेज मांगे जाएं और निष्पक्ष जांच के बाद वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए. उनका कहना है कि इससे वर्षों से चली आ रही आशंकाएं दूर होंगी और गांव में शांति, सौहार्द तथा विकास कार्यों को गति मिलेगी.
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