Hazaribagh : जिले में बिजली विभाग की घोर लापरवाही और चरमराई व्यवस्था ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है. कटकमदाग प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुल्ताना फीडर और उससे जुड़े दर्जनों गांवों में स्थिति बद से बदतर हो चुकी है. मंगलवार की रात करीब 8 बजे जो बिजली कटी, उसने उपभोक्ताओं को पूरी रात रुलाया. पूरे 12 घंटे के खौफनाक ‘ब्लैकआउट’ के बाद बुधवार की सुबह किसी तरह आपूर्ति बहाल तो की गई, लेकिन विभागीय नाकामी का आलम यह है कि सिस्टम अब भी संभलने का नाम नहीं ले रहा है. सुबह लाइट आने के बाद से ही लुकाछिपी का ऐसा नंगा नाच शुरू हुआ है कि जनता त्राहि-त्राहि कर उठी है. बिजली मुश्किल से आधा घंटा रह रही है और फिर घंटों के लिए गोल हो जा रही है. इस लगातार आ-जा रही बिजली के कारण घरों में लगे इन्वर्टर तक पूरी तरह जवाब दे चुके हैं. इन्वर्टर डिस्चार्ज होने से लोगों के मोबाइल बंद हो रहे हैं, पंखे-कूलर ठप्प हैं और इस भीषण गर्मी में लोग घरों के भीतर उबलने को मजबूर हैं.

पानी का हाहाकार और ठप्प पड़ा जनजीवन
बिजली के इस बेपटरी शेड्यूल का सबसे सीधा और घातक असर पानी की सप्लाई पर पड़ा है. मोटर नहीं चल पाने के कारण छतों पर रखी टंकियां सूख चुकी हैं. खाना बनाने, पीने के पानी और दैनिक कार्यों के लिए महिलाओं को भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. बिजली विभाग के इस ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाले रवैये से स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है. लोगों का कहना है कि विभाग सिर्फ भारी-भरकम बिल वसूलना जानता है, लेकिन जब निर्बाध सेवा देने की बात आती है, तो अधिकारी फोन बंद कर बैठ जाते हैं.
बरकट्ठा में फूटा आक्रोश का ज्वालामुखी: 3 दिन के अंधेरे के बाद आधी रात को जाम हुआ जीटी रोड
दूसरी ओर, बरकट्ठा प्रखंड में बिजली विभाग की संवेदनहीनता के खिलाफ आक्रोश का ऐसा ज्वालामुखी फटा कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था हिल गई. बरकट्ठा के कई इलाकों में पिछले तीन दिनों से बिजली पूरी तरह नदारद थी. 72 घंटों से घने अंधेरे और पानी की बूंद-बूंद किल्लत से जूझ रही जनता का सब्र का बांध आखिरकार मंगलवार की आधी रात को टूट गया. गुस्साए हजारों ग्रामीणों और युवाओं का हुजूम सड़कों पर उतर आया. आक्रोशित जनता ने बरकट्ठा में राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया. ग्रामीणों ने सड़क पर टायर जलाकर और मानव श्रृंखला बनाकर बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. आधी रात को हुए इस चक्का जाम से हाइवे पर गाड़ियों की रफ्तार थम गई. ग्रैंड ट्रंक रोड के दोनों तरफ देखते ही देखते ट्रकों, बसों और छोटी गाड़ियों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गई.
रात भर फंसे रहे राहगीर, प्रशासन के फूले हाथ-पांव
हाइवे जाम होने की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा, लेकिन ग्रामीण इस बात पर अड़े थे कि जब तक बिजली व्यवस्था स्थायी रूप से ठीक नहीं होती और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज नहीं गिरती, तब तक जाम नहीं हटेगा. रात भर छोटे-छोटे बच्चों और परिवारों के साथ राहगीर हाइवे पर फंसे रहे. ग्रामीणों का साफ कहना है कि बिजली विभाग की सुस्ती ने उन्हें उग्र आंदोलन के लिए मजबूर किया है. अगर पूरे हजारीबाग जिले की बिजली व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप अख्तियार करेगा.
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