हजारीबाग: शिक्षा के मंदिर में शर्मनाक खेल! मासूम बच्चियों से कटवाई जा रही सब्जी, स्कूल बना ‘बाल श्रम केंद्र’

HAZARIBAGH: सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर एक बार फिर बेनकाब हो गई है. शिक्षा के नाम पर बच्चों के भविष्य से खुलेआम...

HAZARIBAGH: सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर एक बार फिर बेनकाब हो गई है. शिक्षा के नाम पर बच्चों के भविष्य से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है, और जिम्मेदार लोग आंखें मूंदे बैठे हैं.

निरीक्षण में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

केरेडारी प्रखंड के पचड़ा पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय पचड़ा में सुबह करीब 9:30 बजे जो नजारा सामने आया, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया.

स्कूल में मिला ‘श्रमस्थल’ जैसा माहौल

कांग्रेस कमिटी हजारीबाग के जिला महासचिव सह पचड़ा पंचायत के मुखिया महेश प्रसाद साव जब औचक निरीक्षण के लिए स्कूल पहुंचे, तो वहां का दृश्य किसी स्कूल का नहीं बल्कि श्रमस्थल का लग रहा था.

रसोईघर में रसोइयों की लापरवाही

रसोईघर में जहां रसोइया को बच्चों के लिए भोजन बनाना चाहिए था, वहां वे आराम फरमा रही थीं, और कक्षा छह की दो मासूम बच्चियों के हाथों में किताबों की जगह चाकू थमा दिया गया था. उनसे सब्जी कटवाई जा रही थी वो भी बिना किसी संकोच के.

बाल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन

यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे बाल अधिकारों का उल्लंघन है. सवाल उठता है कि क्या अब सरकारी स्कूलो में पढ़ाई की जगह बच्चों से काम करवाना नई व्यवस्था बन गई है?

शिक्षकों की भूमिका पर सवाल

मौके पर मौजूद दो शिक्षक भी इस गंभीर मामले से अनजान बने रहे, जो उनकी जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है.

मुखिया का फूटा गुस्सा

स्थिति को देखकर मुखिया महेश प्रसाद साव का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने तत्काल प्रधानाचार्य दुखहरण महतो को बुलाकर कड़ी फटकार लगाई और साफ चेतावनी दी कि स्कूल में बच्चों से किसी भी प्रकार का काम करवाना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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रसोइयों को भी लगाई फटकार

उन्होंने रसोइयों को भी जमकर लताड़ लगाई और दो टूक कहा कि अगर दोबारा ऐसी हरकत सामने आई, तो सीधी कार्रवाई तय मानी जाए.

उच्चस्तरीय जांच की मांग

इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को हिला दिया है. मुखिया ने साफ तौर पर कहा कि इस घटना की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषी शिक्षकों व कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

प्रणाली पर गंभीर सवाल

यह घटना सिर्फ एक स्कूल की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की पोल खोलती है जहां नियमों को ताक पर रखकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.

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