सादगी, ईमानदारी और न्याय: H. J. Kania की अनसुनी बातें

NEWS DESK: आजादी के बाद जब भारत ने अपना संविधान अपनाया और 26 जनवरी 1950 को Supreme Court of India की स्थापना...

NEWS DESK: आजादी के बाद जब भारत ने अपना संविधान अपनाया और 26 जनवरी 1950 को Supreme Court of India की स्थापना हुई, तब देश में न्याय व्यवस्था के एक नए युग की शुरुआत हुई. इसी ऐतिहासिक दिन भारत को उसके पहले मुख्य न्यायाधीश के रूप में H. J. Kania मिले.

शुरुआती जीवन और शिक्षा

जस्टिस कानिया का जन्म 3 नवंबर 1890 को गुजरात के सूरत में एक शिक्षित परिवार में हुआ था. पढ़ाई में उत्कृष्ट रहे कानिया ने भावनगर के समालदास कॉलेज से स्नातक किया और इसके बाद बॉम्बे के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की. छात्र जीवन में ही उन्होंने न्याय के क्षेत्र में आगे बढ़ने का लक्ष्य तय कर लिया था.

वकालत से जज तक का सफर

साल 1915 में उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में वकालत की शुरुआत की. अपनी कड़ी मेहनत, सादगी और कानून की गहरी समझ के कारण वे जल्द ही पहचान बनाने लगे. 1930 में वे एक्टिंग जज बने, 1931 में एडिशनल जज और 1933 में स्थायी जज नियुक्त किए गए. बाद में 1944 और 1945 में उन्होंने एक्टिंग चीफ जस्टिस के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली.

पहले CJI के रूप में शपथ

1946 में उन्हें फेडरल कोर्ट ऑफ इंडिया का जज बनाया गया, जो आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट की नींव साबित हुआ. 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ और 26 जनवरी 1950 को सुप्रीम कोर्ट अस्तित्व में आया. इसी दिन जस्टिस एच. जे. कानिया ने भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली.

सादगी और न्यायप्रियता के प्रतीक

रिपोर्ट्स के अनुसार, 1950 में पहले CJI का वेतन 5,000 रुपये प्रति माह तय किया गया था. उस समय यह राशि काफी सम्मानजनक मानी जाती थी, लेकिन उनके व्यक्तित्व में सादगी और कर्तव्यनिष्ठा साफ झलकती थी. वे अपने शांत स्वभाव और निष्पक्ष न्याय के लिए जाने जाते थे.

कार्यकाल और विरासत

जस्टिस कानिया का कार्यकाल 26 जनवरी 1950 से 6 नवंबर 1951 तक रहा. वे पद पर रहते हुए ही इस दुनिया से विदा हो गए और इस तरह वे पहले ऐसे CJI भी बने जिनका निधन कार्यकाल के दौरान हुआ. अपने छोटे लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली, अनुशासन और संविधान के प्रति सम्मान की मजबूत नींव रखी, जो आज भी भारतीय न्याय व्यवस्था की पहचान है.

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