Hazaribagh: हजारीबाग की पहचान तेजी से शैक्षणिक हब के रूप में बन रही है. शहर के कोर्रा, मटवारी, बाबूगांव, लाखे समेत विभिन्न इलाकों में बड़ी संख्या में निजी ट्यूशन और कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं. बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए न केवल हजारीबाग बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में छात्र यहां पहुंचते हैं. इन संस्थानों से शिक्षकों और अन्य लोगों को रोजगार मिल रहा है, लेकिन दूसरी ओर कुछ ट्यूशन सेंटरों की बुनियादी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं. आरोप है कि अधिक मुनाफे की होड़ में छात्रों की संख्या तो बढ़ाई जा रही है, लेकिन उनके बैठने, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा.

अधिक कमाई की होड़ में छोटे कमरों में बढ़ती छात्रों की संख्या
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि कुछ ट्यूशन सेंटर संचालक सीमित जगह में अधिक से अधिक बैच चलाकर आय बढ़ाने में लगे हैं. छोटे कमरों में क्षमता से अधिक छात्रों को लंबे समय तक बैठाकर पढ़ाने की शिकायतें सामने आ रही हैं. इससे कमरे में पर्याप्त हवा और रोशनी की उपलब्धता के साथ-साथ छात्रों के आराम और स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ी है.
किराये के लालच में जर्जर भवन भी बन रहे ट्यूशन सेंटर
स्थानीय लोगों के अनुसार, अधिक किराया हासिल करने के उद्देश्य से कुछ मकान मालिक जर्जर, टूटे-फूटे या अर्धनिर्मित भवनों और कमरों को भी ट्यूशन सेंटरों के लिए किराये पर दे रहे हैं. ऐसे भवनों की मजबूती और बड़ी संख्या में छात्रों को सुरक्षित रखने की क्षमता की जांच जरूरी है. सवाल यह भी है कि किसी भवन में सैकड़ों छात्रों को नियमित रूप से बैठाने से पहले उसकी संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन किया जाता है या नहीं.
पढ़ाई के साथ सुरक्षा मानकों की भी हो जांच
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन उनकी सुरक्षा उससे भी महत्वपूर्ण है. ट्यूशन सेंटरों में भवन की स्थिति, कमरों की क्षमता और वहां मौजूद छात्रों की संख्या का अनुपात जांचा जाना चाहिए. इसके अलावा आग लगने या किसी अन्य आपात स्थिति में बाहर निकलने के सुरक्षित रास्ते और अग्नि सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता की भी पड़ताल जरूरी है.
स्वच्छ पानी और शौचालय की सुविधा पर भी सवाल
कई ट्यूशन सेंटरों में स्वच्छ पेयजल और पर्याप्त शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. छात्रों को कई घंटे संस्थानों में बिताने पड़ते हैं. ऐसे में स्वच्छ पानी और साफ-सुथरे शौचालय की व्यवस्था जरूरी है. छात्राओं के लिए पर्याप्त और सुरक्षित शौचालय की सुविधा उपलब्ध होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.
अभिभावकों ने की सभी सेंटरों की जांच की मांग
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने शहर में संचालित निजी ट्यूशन और कोचिंग सेंटरों की व्यापक जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जांच के दौरान भवन की मजबूती, कमरे की क्षमता, छात्रों की संख्या, अग्नि एवं आपातकालीन सुरक्षा, पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की स्थिति देखी जाए.
नियमों की अनदेखी पर हो कार्रवाई
अभिभावकों का कहना है कि जो संस्थान निर्धारित सुरक्षा और बुनियादी मानकों को पूरा नहीं करते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर ऐसे सेंटरों को तब तक संचालित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जब तक वे आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित न कर लें. हजारीबाग को शैक्षणिक हब के रूप में विकसित करने के साथ यह भी जरूरी है कि यहां पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिले. शिक्षा की गुणवत्ता के साथ छात्रों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को भी प्राथमिकता देने की जरूरत है.
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