Hazaribagh: सदर अंचल क्षेत्र अंतर्गत मौजा सरले में खाता संख्या 93 और प्लॉट संख्या 72 की बहुमूल्य जमीन को लेकर शुक्रवार को उस वक्त भारी विवाद और हड़कंप मच गया, जब एक पक्ष द्वारा नाले से सटे इलाके में पक्का बाउंड्रीवॉल और निर्माण कार्य शुरू कराया गया. 2 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में फैली और सरकारी अभिलेखों में ‘गैर मजरुआ खास’ के रूप में दर्ज इस जमीन पर एक साथ तीन-तीन पक्ष अपना-अपना मालिकाना हक जताते हुए आमने-सामने आ गए. जमीन पर कब्जे, 14 पन्नों के केस, धोखाधड़ी और पैसों की ठगी को लेकर पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई. मामले की गंभीरता और प्रशासनिक सूचना मिलते ही सदर अंचल अधिकारी आशुतोष कुमार पुलिस और राजस्व टीम के साथ खुद मौके पर पहुंचे और चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोक दिया.
“परदादा के समय से कर रहे हैं खेती, अब डोजरिंग से कुचलने की दी जा रही है धमकी”
विवाद के दौरान स्थानीय महिला मती लिंडा पक्ष ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि वे लोग कई पीढ़ियों से इस जमीन पर रह रहे हैं और उनके पूर्वजों ने गड्ढों को भरकर इसे खेती योग्य बनाया था. महिला का आरोप है कि राजद सचिव प्रदीप महतो और उनके लोग लगातार उन्हें परेशान कर रहे हैं और जबरन घर खाली कराने के लिए ‘डोजरिंग’ कराकर कुचलने की धमकियां दे रहे हैं. महिला ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पूर्व में भी केस दर्ज कराया था, जिसमें आरोपी जेल भी जा चुका है और उनके पास कोर्ट-कचहरी के 14 पन्नों के तमाम कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं. वहीं मौके पर मौजूद दूसरे पक्ष ने आरोप लगाया कि जमीन के नाम पर उनसे 7 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक की ठगी की गई है और फर्जी एग्रीमेंट के जरिए उन्हें ठगा गया है.
“1 एकड़ 9 डिसमिल जमीन बदले में मिली है, 2022 से दफ्तरों के चक्कर काट रहा हूँ”: प्रदीप मेहता
दूसरी तरफ खुद को भूमि का असली हकदार बताते हुए राजद के सचिव प्रदीप प्रसाद मेहता (पिता स्वर्गीय सुखदेव प्रसाद मेहता) ने अपना पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि यह 1 एकड़ 9 डिसमिल जमीन उन्हें प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बदले में (रेयाती प्लॉट) दी गई है. उनके अनुसार, वर्ष 2018 में तत्कालीन एसडीएम आदित्य रंजन द्वारा जांच के बाद उन्हें यह जमीन हस्तांतरित की गई थी और 72 नंबर प्लॉट में उनका एक कमरा भी बना हुआ है. प्रदीप मेहता ने आरोप लगाया कि 2022 से लेकर 2026 तक वे अंचल कार्यालय से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक न्याय के लिए भटक रहे हैं (लेटर नंबर 1590). शुक्रवार को जब वे अपनी जमीन पर बाउंड्रीवॉल का काम करा रहे थे, तो जबरन काम रुकवा दिया गया. वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने 2000 एकड़ जमीन के ऐतिहासिक दावों का हवाला देते हुए अंचल कार्यालय द्वारा कागजात उपलब्ध न कराने की शिकायत की.
गैर मजरुआ खास और प्रतिबंधित सूची में दर्ज है प्लॉट, बिना कागजात जांच नहीं होगा काम: सीओ
घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सदर अंचल अधिकारी आशुतोष कुमार ने मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की. सीओ ने बताया कि मामला मौजा सरले के खाता नंबर 93, प्लॉट नंबर 72 का है, जिसका कुल रकबा करीब 2 एकड़ 62 डिसमिल है और जमीन की किस्म ‘गैर मजरुआ खास’ है. पास में ही एक प्राकृतिक नाला बहता है, जिसे अवरुद्ध कर निर्माण कराने की सूचना मिली थी. सीओ ने कहा कि वर्तमान में यह प्लॉट सरकारी ‘प्रतिबंधित सूची’ में डाला हुआ है. जो भी पक्ष सेटलमेंट (बंदोबस्ती) या कोर्ट के आदेश का दावा कर रहे हैं, उन्हें अपने तमाम कागजात अंचल कार्यालय में प्रस्तुत करने होंगे. जब तक अमीन और हल्का कर्मचारी कागजातों की संपूर्ण जांच और स्थल रिपोर्ट तैयार नहीं कर लेते, तब तक किसी भी तरह के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.
तीन दावेदार और नाले का अतिक्रमण: अंचल टीम करेगी अभिलेखों का अवलोकन
मौके पर मौजूद राजस्व अमीन ने बताया कि यह प्लॉट बेहद संवेदनशील है क्योंकि इस पर एक साथ तीन अलग-अलग दावेदार—प्रदीप मेहता, मती लिंडा, मिथलेश मेहता का पक्ष और एक अन्य का पक्ष सामने आए हैं. इसके अलावा पक्के निर्माण से नाले के बहाव क्षेत्र के भी प्रभावित होने की आशंका है. अंचल प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अंचल कार्यालय में सभी पक्षों के कागजातों का सूक्ष्म अवलोकन किया जाएगा. जांच में जो भी तथ्य कानूनी रूप से सही पाए जाएंगे, उसी आधार पर आगे की कठोर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
ALSO READ : पाकुड़: मौसी घर से लौटेंगे भगवान मदन मोहन, भक्तों में उत्साह
