Hazaribagh: हजारीबाग जिले में संवेदक संघ ने सरकार और प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. रॉयल्टी में अप्रत्याशित 10 गुना वृद्धि, मार्च महीने से बकाए बिलों का भुगतान न होना, विभागीय अफसरशाही और अत्यधिक कमीशनखोरी से आक्रोशित संवेदकों ने एकजुट होकर हजारीबाग में आयोजित सभी सरकारी टेंडरों का पूर्ण बहिष्कार कर दिया. इस दौरान भारी संख्या में जुटे संवेदकों ने नारेबाजी करते हुए राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर जमकर हमला बोला. संवेदकों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो वे टेंडर बहिष्कार के साथ-साथ आने वाले समय में राज्य विधानसभा का घेराव करेंगे.
10 गुना रॉयल्टी और अनलिमिटेड लेस टेंडर ने तोड़ी ठेकेदारों की कमर
विरोध दर्ज कराते हुए संवेदक संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि पूर्व में ली जाने वाली दोगुनी रॉयल्टी के स्थान पर अब अचानक 10 गुना रॉयल्टी मांगी जा रही है, जो पूरी तरह अनुचित है. इसके अलावा माइनिंग पोर्टल को जानबूझकर बंद रखा गया है, जिससे रोजमर्रा के कामकाज में भारी समस्याएं आ रही हैं. संवेदकों का कहना है कि टेंडर ‘अनलिमिटेड लेस’ दर पर जा रहे हैं, जबकि प्रोजेक्ट्स का एस्टीमेट पुराने डीपीआर के आधार पर ही चल रहा है. नए एस्टीमेट और रेट रिवीजन का मुद्दा लंबे समय से लटका हुआ है, जिसके कारण संवेदक अपना घर-द्वार तक बेचने को मजबूर हो रहे हैं.
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12 से 15 प्रतिशत सीएस कमीशन का आरोप, ‘हैंड टू माउथ’ हुए संवेदक
संवेदकों ने अधिकारियों और प्रशासनिक तंत्र पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यहां 12 से लेकर 15 प्रतिशत तक ‘सीएस’ (कमीशन) की मांग की जा रही है. संघ के सदस्यों ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि मार्च महीने से किसी भी योजना का भुगतान नहीं किया गया है. जिन्होंने बाजार से कर्ज और उधार लेकर काम पूरा करा दिया है, वे आज पाई-पाई के लिए मोहताज हैं और ‘हैंड टू माउथ’ की स्थिति में पहुंच गए हैं. घर-परिवार और बाजार की देनदारी के कारण संवेदकों के बीच त्राहिमाम की स्थिति बनी हुई है.
न बालू का लीज, न ईंट का चालान: 200 किलोमीटर दूर से सामग्री लाने की मजबूरी
कार्यस्थल पर आ रही व्यावहारिक दिक्कतों का जिक्र करते हुए संवेदकों ने बताया कि झारखंड में न तो बालू घाटों का लीज सही तरीके से दिया जा रहा है और न ही ईंट का चालान मिल रहा है. स्थानीय स्तर पर 30 किलोमीटर की दूरी के बजाए ठेकेदारों को 200 किलोमीटर दूर बिहार और चुटुपालू जैसे इलाकों से बालू व चिप्स लाकर काम कराना पड़ रहा है. इसके बावजूद लाए गए सामान के चालान को मान्यता नहीं दी जाती. सरकार न तो लीज उपलब्ध करा रही है और न ही पारदर्शी व्यवस्था बना रही है, जिसका सीधा असर विकास योजनाओं की गति पर पड़ रहा है.
“नहीं चलेगी अफसरशाही”, हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ की जमकर नारेबाजी
टेंडर प्रक्रिया के बहिष्कार के बाद संवेदकों का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिला. एकजुट हुए संवेदकों ने एक स्वर में “अफसरशाही नहीं चलेगी”, “10 गुना रॉयल्टी वापस लो”, “मार्च से रुका हुआ भुगतान तुरंत करो” और “संवेदक संघ जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए. इस दौरान संवेदकों ने हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जताई. संवेदक संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पुरानी रॉयल्टी दर लागू नहीं की जाती, बकाए बिलों का भुगतान नहीं होता और कमीशनखोरी पर लगाम नहीं लगती, तब तक टेंडरों का बहिष्कार जारी रहेगा.
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