हजारीबाग बनेगा देश का ‘मॉडल पर्ल हब’, केंद्र ने एकमात्र ‘मोती क्लस्टर’ के रूप में किया चिन्हित

Hazaribag : जिले को मत्स्य पालन और विशेष रूप से मोती (पर्ल) उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने की...

Hazaribag : जिले को मत्स्य पालन और विशेष रूप से मोती (पर्ल) उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने की कवायद तेज हो गई है, भारत सरकार द्वारा हजारीबाग को देश के एकमात्र पर्ल क्लस्टर के रूप में चिन्हित किए जाने के बाद अब इसे ‘मॉडल पर्ल हब’ के रूप में विकसित करने की तैयारी है, मत्स्य निदेशालय, रांची की उच्चस्तरीय टीम ने जिले में संचालित विभिन्न परियोजनाओं का विस्तृत निरीक्षण किया.

निदेशक मत्स्य ने लिया जायजा

​मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार, उप निदेशक शम्भू प्रसाद यादव और मत्स्य प्रसार पदाधिकारी श्रीमती किरण ने हजारीबाग के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। टीम ने दौरवा–कुंडवा क्षेत्र में विकसित पोंड क्लस्टर का निरीक्षण किया, यहाँ रांची से आए विशेषज्ञों द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण सह डेमोंस्ट्रेशन कार्यक्रम की प्रगति देखी गई.

​महिलाओं के नेतृत्व में बनेगा फ्पो

​निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने महिला स्वयं सहायता समूहों को मोती पालन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। निदेशक ने घोषणा की कि हजारीबाग में केवल महिलाओं के लिए फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन का गठन किया जाएगा, उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगी.

​तिलैया जलाशय में ‘केज कल्चर’ के साथ मोती पालन

​टीम ने बरही अनुमंडल के बुंडू (तिलैया जलाशय) में संचालित केज कल्चर का भी जायजा लिया। यहाँ केज के किनारों पर किए जा रहे मोती पालन के अनूठे मॉडल की सराहना की गई, अधिकारियों ने इस मॉडल को आय बढ़ाने का एक प्रभावी तरीका बताते हुए इसे बड़े पैमाने पर विस्तारित करने की आवश्यकता जताई.

​प्रशासन की योजना: राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

​उपायुक्त के अनुसार जिले के जल संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग कर युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है, विभाग अब प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, क्लस्टर विकास और मार्केटिंग (विपणन) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.

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