Ranchi: हजारीबाग में हुए ट्रेजरी घोटाले मामले में सीआईडी की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है. आज सीआईडी की टीम हजारीबाग गई और इस मामले में सभी आरोपी को कड़ी सुरक्षा के बीच सीआईडी ऑफिस लाया गया. सीआईडी की टीम दो दिनों तक सभी आरोपियों से पूछताछ करने वाली है. राज्य के अलग-अलग जिलों में हुए ट्रेजरी घोटाले ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. इस घोटाले में सभी पुलिस विभाग के ही हैं और सबकी मिली भगत से इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया है. मामले की संवेदनशीलता और सुरक्षा खतरों को देखते हुए पुलिस प्रशासन बेहद सतर्क है. आरोपी को हजारीबाग से रांची स्थानांतरित करने के लिए एक हाई-प्रोफाइल सुरक्षा दस्ता तैयार किया गया था. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता सुरक्षा घेरे के बीच आरोपी को रांची लाया गया है, जहां जांच एजेंसियां उससे आगे की पूछताछ करने वाली है.

करोड़ों रुपये के घोटाले का है मामला
हजारीबाग ट्रेजरी स्कैम सरकारी राजस्व में हेरफेर और फर्जी दस्तावेजों के सहारे करोड़ों रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा है. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि विभाग के कुछ कर्मचारियों और बाहरी बिचौलियों की मिलीभगत से इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया है. मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद से ही पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा की टीमें इस नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं. जांच अधिकारियों का मानना है कि आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने से इस घोटाले में शामिल कई अन्य सफेदपोशों और बड़े अधिकारियों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं.
जांच अधिकारियों की एक संयुक्त टीम आरोपी से कड़ाई से पूछताछ करेगी. मुख्य रूप से गायब फाइलों, फर्जी हस्ताक्षरों और बैंक खातों में ट्रांसफर की गई रकम के स्रोतों के बारे में सवाल-जवाब किए जाएंगे.इसके अलावा, पुलिस इस बात का भी पता लगाएगी कि घोटाले की इस राशि का निवेश कहां-कहां किया गया है और इसके तार किन-किन बड़े लोगों से जुड़े हैं.
जानें हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले में कौन-कौन है आरोपी?
हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले में मुख्य मास्टरमाइंड सिपाही शंभू कुमार, पुलिस विभाग के लेखा शाखा में तैनात सिपाही है, जो इस घोटाले का मुख्य सरगना माना जा रहा है. रंजिश सिंह और धीरेंद्र सिंह जो पुलिस लेखा शाखा में तैनात सिपाही है. खुशबू नाम की महिला मुख्य आरोपी शंभू कुमार की पत्नी है. अनु पांडेय जो एक अन्य पुलिसकर्मी की पत्नी है. एक अन्य आरोपी सौरभ कुमार सिंह है. इस मामले में पुलिसकर्मियों और उनके सहयोगियों ने फर्जी वेतन निकासी का तरीका अपनाकर लगभग 15 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी की है.
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