Ranchi: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में मीडिया कर्मियों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. भाजपा ने इस फैसले को लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को कठघरे में खड़ा किया है. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रमाकांत महतो ने कहा कि रिम्स प्रबंधन का यह फैसला अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रशासनिक विफलताओं और मरीजों की समस्याओं को छुपाने का प्रयास है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के सामने स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक तस्वीर आने से डर रही है, इसलिए मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है. रमाकांत महतो ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और उसकी जिम्मेदारी जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाना तथा व्यवस्था की जवाबदेही तय करना है. ऐसे में मीडिया को अस्पताल परिसर से दूर रखने का निर्णय कई गंभीर सवाल खड़े करता है.

निशाने पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने के बजाय अव्यवस्थाओं पर पर्दा डालने की चिंता है. पिछले छह वर्षों में दवा खरीद, स्वास्थ्य उपकरणों की खरीद, एएनएम नियुक्ति और सुरक्षा गार्ड बहाली जैसे कई मामलों में पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं. ऐसे समय में मीडिया की निगरानी और रिपोर्टिंग और अधिक जरूरी हो जाती है.
मीडिया पर प्रतिबंध लगाना कांग्रेस की मानसिकता
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की मानसिकता कांग्रेस की कार्यसंस्कृति को दर्शाती है. देश ने आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता पर लगाए गए प्रतिबंधों को देखा है और झारखंड में भी उसी सोच की झलक दिखाई दे रही है. उन्होंने राज्य सरकार से रिम्स में मीडिया के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंधात्मक आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को अपनी विफलताओं को छुपाने के बजाय अस्पतालों में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए.
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