Click Here
Click Here
Click Here

हजारीबाग का ‘घोड़ा अस्पताल’ बना अवैध वसूली का अड्डा, मुफ्त दवाओं और इंजेक्शन के नाम पर वसूली

Hazaribag: अंग्रेजों के समय से घोड़ा अस्पताल के नाम से मशहूर हजारीबाग का एकमात्र पशु-पक्षी अस्पताल इन दिनों अव्यवस्था और कथित अवैध...

Hazaribag: अंग्रेजों के समय से घोड़ा अस्पताल के नाम से मशहूर हजारीबाग का एकमात्र पशु-पक्षी अस्पताल इन दिनों अव्यवस्था और कथित अवैध वसूली को लेकर सवालों के घेरे में है. पशुपालकों का आरोप है कि सरकार द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं और इलाज के नाम पर अस्पताल में खुलेआम पैसे वसूले जा रहे हैं. इतना ही नहीं, नकद के साथ-साथ फोनपे के जरिए भी राशि ली जा रही है. मामला तब सामने आया जब एक न्यूज चैनल के पत्रकार के भाई अपने पालतू कुत्ते को एंटी रैबीज इंजेक्शन दिलाने अस्पताल पहुंचे. आरोप है कि वहां इंजेक्शन के नाम पर उनसे 80 रुपये मांगे गए. उनके पास 40 रुपये नकद होने पर कर्मियों ने 40 रुपये कैश ले लिया और शेष 40 रुपये किसी परिजन के फोनपे नंबर पर ट्रांसफर करवा लिया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में वर्षों से जमे कुछ कर्मियों ने इसे अवैध कमाई का जरिया बना रखा है. सरकारी दवाओं का इस्तेमाल निजी कमाई के लिए किया जा रहा है, जबकि दूर-दराज ग्रामीण इलाकों से लोग अपने बीमार पशु-पक्षियों को इलाज के लिए यहां लेकर आते हैं.

कर्मचारी निजी तौर पर रखते हैं महंगी दवाएं

बताया जाता है कि अस्पताल में कई कर्मचारी निजी तौर पर महंगी दवाएं रखकर मरीजों को वही दवाएं देने का दबाव बनाते हैं. पशुपालकों का कहना है कि यहां इलाज से ज्यादा पैसे की मांग होती है, जिससे उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है. इलाज कराने बाले से भी पैसा वसूलते हैं यहां के  पशुपालकों का कहना है कि अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है. यहां इलाज की सुविधा केवल सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक ही उपलब्ध रहती है. गंभीर स्थिति में पशुओं को रात में कोई सुविधा नहीं मिलती.

Read Also: दुमका के कोयला कारोबारी अमर मंडल को HC से राहत, कोर्ट ने पीड़क कारवाई और निचली अदालत की कार्यवाही पर लगाई रोक

करोड़ो की मशीनें खा रही धूल

अस्पताल परिसर में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जैसी मशीनें मौजूद हैं, लेकिन वर्षों से उनका उपयोग नहीं हो रहा. मशीनें धूल और जंग खा रही हैं. बीमार पशु-पक्षियों को भर्ती कर रखने की भी समुचित व्यवस्था नहीं है, जबकि कुछ वर्ष पहले नए भवन और आधुनिक संसाधनों के साथ अस्पताल को विकसित किया गया था. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में वर्षों से जमे कुछ कर्मियों का इतना प्रभाव है कि उनके बिना कोई व्यवस्था संचालित नहीं होती. एक कर्मचारी, जिसकी नियुक्ति स्वीपर पद पर हुई थी, वर्तमान में स्टोर से लेकर अस्पताल की कई व्यवस्थाओं पर प्रभाव रखता है. आरोप है कि उसके प्रभाव के कारण कई चिकित्सक भी खुलकर कुछ बोलने से बचते हैं.

प्रशासन से जांच की मांग

पशुपालकों ने जिला प्रशासन से मामले की जांच कर अस्पताल व्यवस्था सुधारने और अवैध वसूली पर रोक लगाने की मांग की है.

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *