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सुविधाओं के ‘महल’ में सिसकती स्वास्थ्य सेवा: हजारीबाग के 10 CHC में डॉक्टरों का टोटा,150 पदों पर मात्र 52 चिकित्सक तैनात

Hazaribaag: किसी भी सभ्य समाज और समृद्ध क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवा को उसकी आत्मा माना जाता है, जहां चिकित्सक उस सेवा...

Hazaribaag: किसी भी सभ्य समाज और समृद्ध क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवा को उसकी आत्मा माना जाता है, जहां चिकित्सक उस सेवा के प्राण होते हैं. लेकिन हजारीबाग जिले की वर्तमान स्थिति को देखें तो यहां स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा तो खड़ा है, पर उसमें जान फूंकने वाले चिकित्सकों का घोर अभाव है. जिले में आलीशान अस्पताल भवन और आधुनिक चिकित्सा उपकरण तो मौजूद हैं, लेकिन चिकित्सकों की भारी कमी के कारण यह पूरी व्यवस्था ‘वेंटिलेटर’ पर नजर आ रही है.

डॉक्टरों की भारी कमी: 52 कंधों पर जिले का भार

जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था का गणित बेहद चिंताजनक है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हजारीबाग जिले के लिए कुल 150 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं. विडंबना यह है कि इनमें से केवल 70 चिकित्सक ही वर्तमान में कार्यरत हैं. इस संख्या में भी जब हम बारीकी से देखते हैं, तो हकीकत और भी डरावनी हो जाती है. इन 70 डॉक्टरों में से 10 स्टडी लीव पर हैं, 3 बिना सूचना के गायब हैं, 4 प्रोग्राम ऑफिसर के तौर पर प्रशासनिक कार्य देख रहे हैं और स्वयं सिविल सर्जन प्रभारी की भूमिका में हैं. कुल मिलाकर महज 52 चिकित्सकों के भरोसे जिले के 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 18 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र  और 56 उप-स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन हो रहा है.

इचाक: अत्याधुनिक संसाधनों के बीच ‘लावारिस’ मरीज

हजारीबाग से मात्र 15 किलोमीटर दूर इचाक प्रखंड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली की सबसे बड़ी मिसाल है. यह केंद्र सभी आधुनिक आधारभूत संरचनाओं, लैब, ऑपरेशन थिएटर और दवाओं से लैस है, लेकिन यहां 10 स्वीकृत पदों के मुकाबले मात्र 2 डॉक्टर अपनी सेवा दे रहे हैं. स्थिति यह है कि यहां कोई नियमित प्रभारी चिकित्सक तक नहीं है और सिविल सर्जन को स्वयं इसका अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है. अस्पताल के पास अपनी एंबुलेंस तक नहीं है, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीज पूरी तरह भगवान भरोसे रहते हैं.

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हाइवे पर हादसों का डर और विशेषज्ञ नदारद

बरकट्ठा और चौपारण जैसे प्रखंड नेशनल हाईवे (NH-2) पर स्थित हैं, जहां अक्सर गंभीर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं. बरकट्ठा में 8 डॉक्टरों की जगह केवल 4 तैनात हैं, जबकि चौपारण में भी स्थिति वैसी ही है. विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण दुर्घटना के शिकार मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सीधे हजारीबाग मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है. इस देरी के कारण कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं.

मजबूरी का फायदा उठा रहे निजी एजेंट

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपलब्धता का सीधा लाभ निजी अस्पतालों के एजेंट उठा रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में ये एजेंट सक्रिय रहते हैं और सरकारी केंद्रों पर डॉक्टर न मिलने से परेशान गरीब मरीजों को बहला-फुसलाकर महंगे निजी क्लीनिकों में ले जाते हैं.

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

जिले के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने स्वीकार किया कि चिकित्सकों की भारी कमी है. उन्होंने बताया कि उपलब्ध सीमित संसाधनों और कम डॉक्टरों के बावजूद यह प्रयास किया जा रहा है कि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी समय पर संचालित हो, ताकि मरीजों को खाली हाथ न लौटना पड़े.

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