Newswave Desk: महंगाई से जूझ रही आम जनता को एक और बड़ा झटका लगा है. तेल कंपनियों ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का ऐलान किया है. इस फैसले के बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत देश के कई बड़े शहरों में ईंधन के दाम बढ़ गए हैं. कई जगहों पर पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई है.
क्यों बढ़ानी पड़ी कीमतें?
भारत अपनी कच्चे तेल की करीब 90 फीसदी जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है. ईरान संघर्ष और Strait of Hormuz में जारी तनाव की वजह से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है. अब तक सरकार और सरकारी तेल कंपनियां टैक्स एडजस्टमेंट और सप्लाई मैनेजमेंट के जरिए बढ़ते दबाव को संभाल रही थीं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार महंगे होते कच्चे तेल के चलते अब घरेलू कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया.

क्या बोले पेट्रोलियम मंत्री?
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने Confederation of Indian Industry के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में कहा था कि पिछले चार सालों में बड़े वैश्विक ऊर्जा संकटों के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई थीं. उन्होंने बताया कि अगर कीमतें नहीं बढ़तीं, तो सरकारी तेल कंपनियों को एक तिमाही में करीब 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता था.
उनके मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का घाटा झेल रही थीं और उनकी कुल अंडर-रिकवरी लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी.
क्या ईंधन की कमी होगी?
सरकार ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है. पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, “देश में पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है. पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई राशनिंग नहीं की जाएगी.
”अधिकारियों के मुताबिक, भारत के पास फिलहाल करीब 60 दिनों का ईंधन स्टॉक और 45 दिनों का एलपीजी भंडार मौजूद है.
