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HC में आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर(HuT) से जुड़े चार आरोपियों की बेल पर सुनवाई

Ranchi: आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर(HuT) से जुड़े चार आरोपी गुलफाम हसन, शबनम परवीन, शहजाद आलम, अयान जावेद की क्रिमिनल अपील (बेल)...

Ranchi: आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर(HuT) से जुड़े चार आरोपी गुलफाम हसन, शबनम परवीन, शहजाद आलम, अयान जावेद की क्रिमिनल अपील (बेल) पर सोमवार को झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश रोगोंन मुखोपाध्याय एवं न्यायाधीश अरुण कुमार राय की खंडपीठ में सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई 20 जुलाई निर्धारित की है. 

मेंटेनेबिलिटी पर चल रही बहस

दरअसल आरोपियों का पक्ष रख रहे अधिवक्ता मुख्तार अंसारी ने बताया कि फिलहाल याचिका की मेंटेनेबिलिटी (सुनने योग्य है या नहीं) इस पर बहस चल रही है इस मामले में अदालत पहले इसकी मेंटेबिलिटी तय करेगी उसके बाद जमानत पर दलीलें दी जा सकेगी, आपको बताते चले कि 25 अप्रैल 2026 को आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर(HuT) के झारखंड माड्यूल का खुलासा किया था जहां एक महिला समेत चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है. सभी की गिरफ्तारी धनबाद के वासेपुर से की गई थी.

युवाओं को गुमराह करने का आरोप

झारखंड एटीएस के मुताबिक हिज्ब उत तहरीर, अलकायदा अकीस (अलकायदा इन इंडियन सबकांटिनेंट), आईएसआईएस और कुछ अन्य प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से जुड़े कुछ व्यक्ति राज्य के अन्य युवकों को अपने नेटवर्क से जोड़कर गुमराह कर रहे हैं. धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देते हुए राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में भी लिप्त हैं. एटीएस के मुताबिक यह बात भी प्रकाश में आयी कि इन संगठनों से संबंधित व्यक्तियों के जरिये धनबाद जिला में अवैध हथियारों के व्यापार के साथ साथ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा था गिरफ्तार आतंकियों के पास से दो पिस्टल, 12 कारतूस, कई इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप के साथ-साथ भारी मात्रा में प्रतिबंधित संगठनों से संबंधित दस्तावेज और किताबें बरामद हुई थी. इस संबंध में एटीएस, रांची में आपराधिक कांड दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है.

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हिज्ब उत तहरीर का गठन हुआ था यरुशलम में

आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर का गठन 1953 में यरुशलम में हुआ था. आतंकी संगठन का मकसद विश्व में खलीफा यानी इस्लामिक स्टेट की स्थापना करना है. साल 2010 में भारत सरकार ने इस्लामी कट्टरपंथी समूह हिज्ब उत तहरीर पर प्रतिबंध लगा दिया था. इस संगठन का मुख्य काम युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर आतंकी गतिविधियों से जोड़ना है. आतंकी गतिविधियों के माध्यम से लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों को उखाड़ कर भारत सहित दुनिया भर में इस्लामी राष्ट्र और खिलाफत स्थापित करना है.

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