Ayush Chauhan

Ranchi : देश के औद्योगिक गौरव कहे जाने वाले हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन की धड़कनें अब किसी भी वक्त थम सकती हैं. वजह सिर्फ घटते कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) नहीं, बल्कि सिर चढ़कर बोल रहा कर्ज का वह पहाड़ है जो अब इस ऐतिहासिक कारखाने को निगलने को आमादा है. संकट की ताजा कड़ी बिजली बिल को लेकर है. बिजली निगम का बकाया लगभग 300 करोड़ पहुंच चुका है. विभाग ने अल्टीमेटम दे दिया है कि अगर तय सीमा के भीतर कम से कम 50 करोड़ का तात्कालिक भुगतान नहीं हुआ, तो बिजली काट दी जाएगी.
मानवता की भी एक एक्सपायरी डेट है !
मौजूदा हेमंत सरकार अब तक ह्यूमैनिटी ग्राउंड (मानवीय आधार) पर कारखाने की बत्ती गुल होने से बचाती रही है, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है. सरकार और निगम की ओर से साफ संकेत हैं कि इस रियायत को बहुत दिनों तक बरकरार नहीं रखा जा सकता. फैक्ट्रियों को चालू रखने के लिए तत्काल 50 करोड़ की संजीवनी देना अनिवार्य हो चुका है, वरना अंधेरा तय है.
2000 करोड़ का दलदल और कंपाउंड इंटरेस्ट का फंदा
एचइसी इस वक्त सिर्फ बिजली संकट से नहीं, बल्कि चौतरफा वित्तीय तबाही से जूझ रहा है. संस्थान पर कुल बकाया लगभग 2000 करोड़ तक जा पहुंचा है. इसमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि देरी के कारण कंपाउंड इंटरेस्ट (चक्रवृद्धि ब्याज) दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है. जो इस कर्ज को और जहरीला बना रहा है.
मद बकाया राशि(करोड़ में)
सुरक्षा( सीआइएसएफ) – 310 करोड़
बिजली बिल – 300 करोड़
सीपीएफ – 300 करोड़
अन्य ऋण – 300 करोड़
कर्मचारियों का वेतन – 150 करोड़
ग्रेच्यूटी – 70 करोड़
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