Hazaribagh: हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में शिव शंकर शर्मा की जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एस. एम. सोनक एवं न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ कर रही है. शुरुआती दौर में अदालत ने तीन सदस्यीय समिति के गठन का आदेश दिया था, जिसने सचिव के माध्यम से अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है.
जांच के लिए बनी थीं टीमें
इसके बाद जांच के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया था, जिसमें सीओ, सीआई और फॉरेस्ट विभाग के अधिकारी भी शामिल थे. वन भूमि की जांच के लिए तकरीबन आधा दर्जन से अधिक प्राथमिकियां भी दर्ज की गई थीं. फिलहाल अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है. मामले में प्रार्थी ने पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है.
क्या है मामला
दरअसल, यह मामला हजारीबाग में वन विभाग की जमीन से जुड़ा है. हजारीबाग एसीबी ने कांड संख्या 11/2025 दर्ज किया था. आरोप है कि विनय कुमार चौबे ने उपायुक्त रहते हुए पांच प्लॉटों की जमाबंदी नियमों के विरुद्ध कराई.
वन भूमि को निजी स्वामित्व में बदलने का आरोप
संबंधित भूमि गैरमजरूआ खास जंगल-झाड़ी के रूप में दर्ज थी, जिसे बाद में निजी स्वामित्व में बदलने की कोशिश की गई. नियमों के अनुसार, इस प्रकार की वन भूमि का उपयोग केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना अन्य कार्यों में नहीं किया जा सकता. आरोप यह भी है कि इस प्रक्रिया में अधिकारियों और विनय सिंह ने खरीदार के रूप में मिलकर साजिश रची थी.



