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विभावि में पीएम-उषा मेरु परियोजना को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित

हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग को पीएम-उषा मेरु विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने के लिए प्राप्त 99.7 करोड़ रुपये की परियोजना...

हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग को पीएम-उषा मेरु विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने के लिए प्राप्त 99.7 करोड़ रुपये की परियोजना की प्रगति की समीक्षा को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई. आर्यभट्ट सभागार में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने की.

बिहार-झारखंड का पहला मेरु विश्वविद्यालय

बैठक में कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने बताया कि बिहार और झारखंड का पहला और इकलौता विश्वविद्यालय विनोबा भावे विश्वविद्यालय है, जिसे “मेरु विश्वविद्यालय” बनने का गौरव प्राप्त हुआ है. उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय का स्टरशिप प्रोजेक्ट बनने जा रहा है. इससे विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाएं खुलेंगी और इसका सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा.

उन्होंने कहा कि यह पहल हम सबको आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने का मौका देती है. इस परियोजना के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे.

केंद्र सरकार से 99.7 करोड़ रुपये की स्वीकृति

ज्ञात हो कि केंद्र सरकार द्वारा विनोबा भावे विश्वविद्यालय को पीएम-उषा मेरु परियोजना के लिए चयनित किया गया है. इस योजना के लिए 99.7 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है. विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इस राशि का उपयोग मेरु नियमावली के अनुसार किया जा रहा है.

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44 बिंदुओं पर दी गई विस्तृत जानकारी

बैठक में मेरु परियोजना के समन्वयक और पीएम-उषा के नोडल पदाधिकारी डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने पावरप्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से योजना के 44 अलग-अलग बिंदुओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास से ही इस योजना को सफल बनाया जा सकता है. इसके लिए सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को परियोजना की बारीकियों को समझना होगा.

हर वर्ष डेढ़ लाख विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

डॉ. मिश्रा ने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख स्नातक विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा. इसके लिए मेंटर की नियुक्ति की जाएगी, ताकि छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन मिल सके.

IIT कानपुर से लिया जा रहा मार्गदर्शन

उन्होंने बताया कि मेरु कार्यक्रम को गुणवत्तापूर्ण ढंग से लागू करने के लिए विश्वविद्यालय का IIT कानपुर के साथ लगातार संवाद जारी है. इसके मार्गदर्शन में योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा.

स्थापित होंगे कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

नोडल पदाधिकारी ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे. इनमें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन साइबर सिक्योरिटी, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन सोशल साइंस तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन अप्लाइड साइंस शामिल हैं.

रोजगारोन्मुख शिक्षा पर होगा फोकस

परियोजना के तहत प्रशिक्षुता और व्यवसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख बनाया जाएगा. साथ ही महाविद्यालयों के साथ क्लस्टरिंग कर भविष्य के कौशल पर आधारित कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे.

डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि पारंपरिक विषय-केंद्रित सोच से हटकर सहयोगी थीम पर काम करना होगा. इस योजना में संभावनाएं असीमित हैं. बैठक में विश्वविद्यालय के कई पदाधिकारी और शिक्षक अच्छी संख्या में उपस्थित थे.

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