News Wave Desk: रांची समेत देश के कई शहरों में मई-जून की गर्म दोपहरें किसी चुनौती से कम नहीं होतीं. तापमान 38 डिग्री तक पहुंच जाता है और उमस भी बढ़ जाती है. ऐसे में सिर्फ एयर कंडीशनर या कूलर पर निर्भर रहना न महंगा है, न ही पर्यावरण के लिए अच्छा है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान, देसी और इको-फ्रेंडली उपाय अपनाकर भी घर को ठंडा और आरामदायक रखा जा सकता है. छाया, वेंटिलेशन और पारंपरिक उपायों से पाएं राहत, बिजली की खपत भी होगी कम.

छाया के सहारे गर्मी को रोकें

घर में दीवारों और खिड़कियों पर सीधी धूप सबसे ज्यादा गर्मी लाती है. इसे रोकना जरूरी है. पश्चिम और दक्षिण की खिड़कियों के बाहर बांस की छड़ी, कैनवास की शेड या सफेद सूती चादर लगाएं. इन्हें 6-8 इंच की दूरी पर लगाना बेहतर रहेगा, जिससे कमरे का तापमान 2 से 4 डिग्री तक कम हो सकता है.छत पर सफेद चूना या कूल-रूफ पेंट लगवाएं, खासकर अगर छत टिन या कंक्रीट की है. यह सूरज की किरणों को रिफ्लेक्ट करता है और घर कम गर्म होता है. ग्रिल पर मनी प्लांट, गिलोय या मॉर्निंग ग्लोरी जैसी बेलें चढ़ाने से भी धूप कम आती है और आस-पास की हवा ठंडी रहती है.
क्रॉस-वेंटिलेशन: प्राकृतिक एसी

घर में ताजा और ठंडी हवा का आना-जाना बहुत जरूरी है. सुबह 5:30 से 7:30 बजे तक आमने-सामने की खिड़कियां खोलें, जब बाहर का तापमान सबसे कम होता है. 9 बजे के बाद खिड़कियां बंद कर दें. दोपहर में टेबल फैन को गर्म दिशा की खिड़की से बाहर की ओर चलाएं, ताकि गर्म हवा बाहर निकल सके और दूसरी ओर से ठंडी हवा अंदर आ सके.
इनलेट पर गीले खस या सूती पर्दे टांगें. इससे हवा और भी ठंडी हो जाती है, और बिजली की खपत भी नहीं होती.
घर के अंदर इको-फ्रेंडली ठंडक

सीलिंग फैन को गर्मियों में एंटी-क्लॉकवाइज और लो स्पीड पर चलाएं, इससे नीचे ठंडी हवा आती है. एलईडी बल्ब का इस्तेमाल करें, इलेक्ट्रॉनिक सामान इस्तेमाल के बाद अनप्लग करें और खाना सुबह जल्दी बना लें-इन सब से गर्मी कम पैदा होती है.
लिविंग एरिया में मटका रखें, जिससे ठंडक बनी रहती है. रात को सूरज ढलने के बाद सभी खिड़कियां खोलकर, किचन एग्जॉस्ट चला कर घर की गर्मी बाहर निकालें.
छोटी-छोटी आदतें, जैसे सुबह वेंटिलेशन, दोपहर को छाया और खिड़कियां बंद रखना, शाम को फर्श गीला करना, घर को बिना एसी के भी ठंडा रख सकती हैं. तीन दिन तक आजमाएं, आपको फर्क खुद दिखेगा-खासतौर पर ऊपर की मंजिलों पर.
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